Sportking India ने वितीय वर्ष 2025-26 के लिए **₹120 करोड़** का मुनाफा दर्ज किया है, जो पिछले साल के **₹113 करोड़** से ज़्यादा है। कंपनी के बोर्ड ने **₹1** प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है। साथ ही, कंपनी ने एक सोलर पावर प्रोजेक्ट भी चालू किया है और ओडिशा में अपनी उत्पादन क्षमता का विस्तार कर रही है।
Sportking India का वित्तीय प्रदर्शन
Sportking India ने वितीय वर्ष 2025-26 के लिए ₹120 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) घोषित किया है। पिछले वितीय वर्ष में यह आंकड़ा ₹113 करोड़ था। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने FY 2025-26 के लिए ₹1 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है।
कंपनी ने क्या-क्या हासिल किया?
Sportking India ने वितीय वर्ष 2025-26 के लिए अपने नतीजे पेश किए हैं। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू ₹2,496 करोड़ रहा, जबकि EBITDA ₹286 करोड़ दर्ज किया गया। कंपनी ने 40.3 MW के सोलर पावर प्रोजेक्ट को चालू कर दिया है। इसके अलावा, ओडिशा में 1.5 लाख स्पिंडल जोड़ने के लिए एक ग्रीनफील्ड विस्तार (Greenfield Expansion) की भी योजना है। कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट में 'रिटेन्ड अर्निंग्स' और 'टोटल इक्विटी' के आंकड़ों में एक मामूली सुधार (Corrigendum) जारी किया गया था, जिसे मैनेजमेंट ने अनजाने में हुई गलती और गैर-महत्वपूर्ण बताया है।
यह क्यों मायने रखता है?
कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन बेहतर मुनाफे को दर्शाता है, भले ही रेवेन्यू स्थिर रहा हो। यह सुधार परिचालन दक्षता (Operational Efficiency) और मार्जिन विस्तार (Margin Expansion) के कारण हुआ है। सोलर प्रोजेक्ट पर फोकस बिजली की लागत को कम करने में मदद करेगा, जबकि ओडिशा में विस्तार से स्पिंडल क्षमता में काफी वृद्धि होगी। कंपनी की क्रेडिट रेटिंग को 'CRISIL A+/Stable' तक अपग्रेड किया जाना भी बेहतर वित्तीय सेहत का संकेत देता है।
आगे क्या?
निवेशक ₹1 प्रति शेयर के डिविडेंड के रूप में रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं। सोलर प्रोजेक्ट से लागत बचत (Cost Savings) की उम्मीद है, और ओडिशा विस्तार से भविष्य में रेवेन्यू में बढ़ोतरी की संभावना है। क्रेडिट रेटिंग में सुधार से उधार लेने की लागत कम हो सकती है और निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है।
जोखिम के कारक
कंपनी अभी भी कॉटन की कीमतों में उतार-चढ़ाव, मौसमी परिस्थितियों और सप्लाई चेन में संभावित बाधाओं के प्रति संवेदनशील है। एक एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड बिजनेस होने के नाते, भू-राजनीतिक जोखिम (Geopolitical Risks) और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में उतार-चढ़ाव भी महत्वपूर्ण चिंताएं हैं।
