Sona Selection India ने Q1 FY27 के नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू **₹148.12 करोड़** रहा। खास बात यह है कि प्लांट एसेट्स की लाइफ बढ़ाने के कारण डेप्रिसिएशन चार्ज कम हुआ, जिससे नेट प्रॉफिट में **₹1.22 करोड़** की बढ़त दर्ज की गई है।
Q1 FY27 का फाइनेंशियल रिपोर्ट कार्ड
कंपनी ने जून 2026 को समाप्त तिमाही के लिए अपने नतीजे जारी किए हैं। स्टैंडअलोन आधार पर कंपनी का रेवेन्यू ₹145.75 करोड़ और नेट प्रॉफिट (PAT) ₹9.65 करोड़ रहा है, जबकि कंसोलिडेटेड लेवल पर प्रॉफिट ₹9.75 करोड़ तक पहुंचा है।
मुनाफे के पीछे का 'अकाउंटिंग ट्विस्ट'
इस रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण जानकारी कंपनी की डेप्रिसिएशन पॉलिसी में किया गया बदलाव है। 1 अप्रैल 2026 से, कंपनी ने अपने प्लांट, मशीनरी और सोलर पावर प्लांट की अनुमानित 'यूजफुल लाइफ' को 15 साल से बढ़ाकर 25 साल कर दिया है।
इस तकनीकी बदलाव के कारण तिमाही का डेप्रिसिएशन चार्ज ₹1.73 करोड़ कम हो गया। इसका सीधा असर यह हुआ कि कंपनी का प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) बढ़ गया और टैक्स एडजस्टमेंट के बाद मुनाफे में ₹1.22 करोड़ का अतिरिक्त इजाफा हुआ।
नई सब्सिडियरी का प्रभाव
यह पहली बार है जब कंपनी के कंसोलिडेटेड आंकड़ों में इसकी सब्सिडियरी 'Sionnah Enterprises Private Limited' का प्रदर्शन शामिल है। जुलाई 2025 में बनी इस कंपनी के शामिल होने के चलते पुराने साल के आंकड़ों से सीधा तुलना करना संभव नहीं है।
निवेशकों के लिए आगे का रास्ता
जानकारों का मानना है कि निवेशकों को कंपनी के कोर ऑपरेटिंग मार्जिन्स पर ध्यान देना चाहिए। यह देखना जरूरी होगा कि डेप्रिसिएशन के इस वन-टाइम फायदे को हटाकर कंपनी का असली परफॉर्मेंस कैसा रहता है। साथ ही, नई सब्सिडियरी के इंटीग्रेशन के बाद आगे के तिमाही नतीजों पर भी नजर रहेगी।
