नया बिजनेस मॉडल और बड़े लक्ष्य
Sky Gold And Diamonds अपने बिजनेस मॉडल में अहम बदलाव ला रही है। कंपनी अब 'एडवांस्ड गोल्ड' स्ट्रेटेजी अपनाएगी, जिसमें वह ज्वैलरी बनाने के पूरे मूल्य की बजाय सिर्फ जॉब वर्क (Job Work) की फीस रिकॉर्ड करेगी। इससे कंपनी के मार्जिन में सुधार होगा और पूंजी की जरूरत भी कम हो जाएगी। Sky Gold And Diamonds ने FY30 के लिए बड़े लक्ष्य तय किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू ₹18,000 करोड़ से ₹19,000 करोड़ तक पहुंचाने और ₹945 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) कमाने का अनुमान है। इसके साथ ही, कंपनी अपनी जमीन और फैक्ट्री जैसी प्रॉपर्टी को बेचकर (Monetize) लीज्ड फैसिलिटी मॉडल पर शिफ्ट होगी, ताकि FY30 तक पूरी तरह कर्ज-मुक्त हो सके।
निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?
यह स्ट्रेटेजिक शिफ्ट शेयरहोल्डर्स के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इससे कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) में सुधार और एक लीन ऑपरेशनल स्ट्रक्चर (Lean Operational Structure) की उम्मीद है। जॉब वर्क फीस पर फोकस करने से कंपनी को बेहतर रिटर्न ऑन इक्विटी (Return on Equity) और कम कैपिटल की जरूरत होगी। FY30 तक कर्ज-मुक्त होना कंपनी के रिस्क को काफी कम कर देगा और इसकी वैल्यूएशन (Valuation) को बढ़ा सकता है। कंपनी ने गवर्नेंस (Governance) में भी सुधार किया है, जिसमें नए ऑडिटर की नियुक्ति और प्रमोटर रेमुनरेशन (Promoter Remuneration) स्ट्रक्चर में बदलाव शामिल हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
अब तक की कहानी
कंपनी के मौजूदा फाइनेंशियल(Financial) प्रदर्शन में सुधार दिख रहा है। मार्च 2025 की तुलना में मार्च 2026 तक नेट वर्किंग कैपिटल डेज (Net Working Capital Days) 71 से घटकर 59 दिन हो गए हैं। ऑपरेटिंग कैश फ्लो (Operating Cash Flow) में भी काफी सुधार हुआ है, कैश बर्न (Cash Burn) (₹272 करोड़) से घटकर (₹45 करोड़) रह गया है। 'एडवांस्ड गोल्ड' बिजनेस का वॉल्यूम FY24 में 6% से बढ़कर FY26 में 12% हो गया है, जो नए मॉडल की शुरुआती सफलता का संकेत है।
क्या बदलेगा अब?
कंपनी का बिजनेस अब एसेट-लाइट (Asset-Light) फ्रेमवर्क पर चलेगा। नेतृत्व को और प्रोफेशनल बनाने के लिए आकाश टेलेरा (Akash Talesara) को सीईओ (CEO) बनाने का प्रस्ताव है। नए ऑडिटर M S K A & Associates LLP (BDO International) नियुक्त किए गए हैं। प्रमोटर्स FY27 से 'जीरो सैलरी' मॉडल अपनाएंगे और उन्हें सिर्फ डिविडेंड (Dividend) के जरिए ही रेमुनरेशन मिलेगा।
जोखिम जिन पर नज़र
इस बदलाव में मुख्य जोखिम योजना के मुताबिक जमीन और फैक्ट्री की प्रॉपर्टी मॉनिटाइजेशन (Monetization) में देरी का है, जो अगस्त-सितंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। ऐसी देरी एसेट-लाइट मॉडल में ट्रांजीशन (Transition) को धीमा कर सकती है और कर्ज कम करने की समय-सीमा को प्रभावित कर सकती है। सोने की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव भी वॉल्यूम को प्रभावित कर सकता है, भले ही हेजिंग (Hedging) की गई हो।
आगे क्या देखना है?
निवेशकों को प्रॉपर्टी मॉनिटाइजेशन प्लान के एग्जीक्यूशन (Execution), लीज्ड फैसिलिटीज में सफल ट्रांजीशन और FY30 तक कर्ज-मुक्त लक्ष्य की ओर प्रगति पर करीब से नज़र रखनी चाहिए। नए सीईओ की नियुक्ति और गवर्नेंस सुधार भी कंपनी की भविष्य की दिशा के अहम संकेतक होंगे।
