बिजली दरों के भारी बोझ और अनव्यायबल स्थितियों के चलते Shyam Century Ferrous ने अपना मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस समेट लिया है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए **₹9.17 करोड़** का घाटा दर्ज किया है और अब इसका पूरा ध्यान प्लांट की संपत्तियों को बेचकर नए अवसर तलाशने पर है।
मैन्युफैक्चरिंग का अंत और नई चुनौती
Shyam Century Ferrous ने 7 मई, 2025 को अपने Byrnihat प्लांट को बंद करने के बाद अब मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से पूरी तरह बाहर निकलने का फैसला किया है। साल भर में कंपनी का उत्पादन मात्र 673 MT फेरो सिलिकॉन तक सीमित रहा, जिसके कारण रेवेन्यू गिरकर ₹30.78 करोड़ पर आ गया है। फिलहाल कंपनी का मुख्य जोर इन्वेंट्री बेचने और पुरानी मशीनरी के निपटान पर है।
NGT का कानूनी संकट
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता National Green Tribunal (NGT) में चल रहा केस है। कोयला खरीद में कथित अनियमितताओं को लेकर कंपनी पर ₹17.39 करोड़ की संभावित देनदारी का खतरा मंडरा रहा है। इस मामले की अंतिम सुनवाई 14 जुलाई, 2026 को होनी है, जिसके लिए कंपनी ने अभी तक कोई वित्तीय प्रावधान (Financial Provision) नहीं किया है।
भविष्य की राह
कंपनी ने अपनी क्रेडिट रेटिंग्स को भी ICRA से वापस लेने का आग्रह किया है। अब निवेशकों की नजरें 25 सितंबर, 2026 को होने वाली 15वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) पर टिकी हैं, जहां एसेट मोनेटाइजेशन और कानूनी विवाद के समाधान पर अपडेट मिलने की उम्मीद है।
