Shree Krishna Infrastructure के लिए मुसीबतें बढ़ गई हैं। फाइनेंशियल ईयर 2026 की ऑडिट रिपोर्ट में 'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन' जारी किया गया है, क्योंकि कंपनी जरूरी फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स पेश करने में नाकाम रही है।
फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स का अता-पता नहीं
मैनेजमेंट में बदलाव के बाद से कंपनी बैंक स्टेटमेंट और वाउचर्स जैसे जरूरी दस्तावेज मुहैया कराने में संघर्ष कर रही है। यही कारण है कि ऑडिटर ने इन नतीजों पर कोई भी राय देने से मना कर दिया है।
नतीजों पर गहरा संदेह
कंपनी ने ₹0.09 करोड़ का नेट प्रॉफिट रिपोर्ट किया है, जो पिछले साल ₹0.03 करोड़ था। वहीं, रेवेन्यू ₹0.84 करोड़ से घटकर ₹0.65 करोड़ पर आ गया है। हालांकि, ऑडिटर्स का कहना है कि वे ट्रांजेक्शन वेरिफाई नहीं कर सके, इसलिए इन आंकड़ों पर भरोसा करना मुश्किल है।
बड़े बदलावों की तैयारी
इन विवादों के बीच कंपनी बोर्ड रीस्ट्रक्चरिंग और कैपिटल बढ़ाने की तैयारी में है:
- ऑथराइज्ड शेयर कैपिटल को ₹12.50 करोड़ से बढ़ाकर ₹40 करोड़ करने की योजना।
- M/s. NKSC & Co. को नए ऑडिटर के रूप में 5 साल के लिए नियुक्त करने का प्रस्ताव।
- प्रमोटर प्रशांत नटवरलाल लखानी का रीक्लासिफिकेशन।
लीडरशिप में उठापटक
जुलाई 2025 में पूर्व CMD रवि कोटिया के इस्तीफे और नवंबर 2025 में अनिल शिव चरण सिंह के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में अपॉइंटमेंट के बाद से कंपनी में हलचल जारी है।
निवेशकों के लिए सलाह: यह कॉर्पोरेट गवर्नेंस का एक गंभीर मामला है। जब तक कंपनी अपनी फाइनेंशियल पारदर्शिता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं करती, तब तक सतर्क रहना ही समझदारी है।
