Shree Cement ने हालिया तिमाही में **14%** की शानदार वॉल्यूम ग्रोथ के साथ **10.52 मिलियन टन** का आंकड़ा छू लिया है। हालांकि, फ्यूल कॉस्ट बढ़कर **INR 2.09 प्रति kCal** होने से कंपनी के मुनाफे पर दबाव बना हुआ है।
वॉल्यूम में दम, मार्जिन पर मार
Shree Cement ने चुनौतीपूर्ण माहौल के बावजूद शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड सेल्स वॉल्यूम 14% बढ़कर 10.52 मिलियन टन रहा, जिसमें भारत के ऑपरेशंस का अहम योगदान है। वहीं, रेडी-मिक्स कंक्रीट सेगमेंट में तो 153% का तूफान आया है, जिसने INR 129 करोड़ का रेवेन्यू जेनरेट किया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड EBITDA INR 1,016 करोड़ रहा, जो बढ़ते खर्चों के असर को दर्शाता है।
फ्यूल कॉस्ट और मैनेजमेंट की रणनीति
निवेशकों के लिए फिलहाल 'फ्यूल कॉस्ट' सबसे बड़ा सिरदर्द है। यह पिछले साल के INR 1.66 से बढ़कर INR 2.09 प्रति kCal पर पहुंच गया है। रिस्क कम करने के लिए मैनेजमेंट ने पेट कोक (Pet Coke) पर अपनी निर्भरता को 66% से घटाकर महज 11% कर दिया है। कंपनी ने वित्त वर्ष के लिए 40-41 मिलियन टन का वॉल्यूम गाइडेंस बरकरार रखा है।
कैपेसिटी विस्तार और भविष्य का रोडमैप
कंपनी अपनी क्षमता को 80 मिलियन टन तक ले जाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। UAE में 3 मिलियन टन की नई क्षमता जुड़ने से वहां कुल कैपेसिटी 7 मिलियन टन हो गई है। भारत में मेघालय प्लांट का काम वापस पटरी पर है, जिसे मार्च 2028 तक शुरू करने का लक्ष्य है। कंपनी अब प्रीमियम प्रोडक्ट्स के पोर्टफोलियो को मौजूदा 29% से बढ़ाकर 40% से ऊपर ले जाने की योजना बना रही है।
आगे क्या रखें ध्यान?
मैनेजमेंट को दूसरी छमाही (H2) में इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे और डेटा सेंटर सेक्टर से अच्छी मांग की उम्मीद है। हालांकि, फ्यूल कॉस्ट का INR 2.15 से INR 2.20 प्रति kCal के बीच रहने का अनुमान मार्जिन पर असर डाल सकता है, जिस पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।
