Shivom Investment ने दिवालियापन की प्रक्रिया (CIRP) पूरी कर ली है और अब मेटल मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ रही है। कंपनी ने FY26 में ₹3.50 करोड़ की आय पर ₹2.88 करोड़ का मुनाफा कमाया है, हालांकि इसके शेयर अभी भी निलंबित हैं।
Shivom Investment ने पूरी की CIRP, अब मेटल मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस
Shivom Investment ने वित्तीय वर्ष (FY) 2025-26 के लिए ₹2.88 करोड़ का टैक्स के बाद मुनाफा (Profit After Tax) दर्ज किया है।
इसी अवधि में कंपनी की कुल आय (Total Income) ₹3.50 करोड़ रही।
निवेशकों के लिए खास: कंपनी के टर्नअराउंड की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन ट्रेडिंग सस्पेंशन और नई यूनिट की प्रगति पर नज़र रखना ज़रूरी है।
क्या हुआ?
Shivom Investment & Consultancy Ltd ने 18 अगस्त 2025 को कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। अब कंपनी अपनी पुरानी निष्क्रिय नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) की भूमिका से हटकर मेटल और मेटल-आधारित उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग करने वाली कंपनी बन गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 को एक बदलाव का दौर माना जा रहा है, जिसमें कंपनी के पास कोई सक्रिय कमर्शियल ऑपरेशन्स नहीं थे।
क्यों है यह अहम?
दिवालियापन की प्रक्रिया से गुजरने के बाद यह कंपनी के लिए एक बड़ा बदलाव है। मेटल मैन्युफैक्चरिंग जैसे नए उद्योग में कदम रखना एक संभावित टर्नअराउंड का संकेत देता है। हालांकि, कंपनी अभी भी इस परिवर्तन के शुरुआती दौर में है और ऑपरेशन्स को स्थिर करने तथा नए बिजनेस की योजना बनाने के प्रयास जारी हैं।
बैकग्राउंड की कहानी
पहले एक निष्क्रिय NBFC रही Shivom Investment ने CIRP की प्रक्रिया पूरी की है। अब कंपनी नए मैनेजमेंट के अधीन है, जिसका ध्यान मेटल प्रोडक्ट्स मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस स्थापित करने पर है। इस बदलाव के दौर के कारण, मौजूदा वित्तीय आंकड़े मुख्य व्यावसायिक गतिविधियों के बजाय प्रशासनिक गतिविधियों को दर्शाते हैं।
अब क्या बदलेगा?
कंपनी की रणनीतिक दिशा में मौलिक रूप से बदलाव आया है। अब इसका फोकस प्रशासनिक स्थिरीकरण और अपनी मेटल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की नींव रखने पर है। भविष्य की ग्रोथ पहलों को बढ़ावा देने के लिए शेयरधारकों से ₹500 करोड़ तक की उधार लेने की शक्ति और ₹200 करोड़ तक की निवेश सीमा बढ़ाने की मंजूरी मांगी गई है।
ऑडिटर और रेगुलेटरी जोखिम
सावधान रहने की एक वजह यह भी है कि स्टेट्यूटरी ऑडिटर ने ओपिनियन का डिस्क्लेमर (Disclaimer of Opinion) जारी किया है। इसका मतलब है कि वे वित्तीय विवरणों पर राय नहीं बना सके, क्योंकि यह एक संक्रमणकालीन अवधि थी और ऐतिहासिक संपत्ति व देनदारियों के बारे में जानकारी की कमी थी। इसके अलावा, पिछले मैनेजमेंट द्वारा सालाना लिस्टिंग फीस का भुगतान न करने के कारण कंपनी के शेयर बीएसई (BSE) पर निलंबित बने हुए हैं। इस निलंबन को हटाने के लिए आवेदन किया गया है।
पीयर तुलना
चूंकि कंपनी बदलाव के दौर में है और नए सेक्टर में कोई सक्रिय कमर्शियल ऑपरेशन्स नहीं हैं, इसलिए मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए सीधे पीयर (Peer) से तुलना करना संभव नहीं है। NBFC के तौर पर इसके पिछले ऑपरेशन्स अब बंद हो चुके हैं।
महत्वपूर्ण मेट्रिक्स
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए, Shivom Investment ने ₹3.50 करोड़ की कुल आय और ₹0.61 करोड़ का कुल व्यय दर्ज किया, जिसके परिणामस्वरूप ₹2.88 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स हुआ। कुल संपत्ति ₹38.25 करोड़ थी, जिसमें ₹6.44 करोड़ की पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल थी। इसकी तुलना 2024-25 के वित्तीय वर्ष से की जाए, जब ₹3.87 करोड़ की कुल आय पर ₹3.70 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स था।
आगे क्या देखें
निवेशकों को बीएसई (BSE) पर ट्रेडिंग सस्पेंशन को हटाने की प्रक्रिया की प्रगति पर बारीकी से नज़र रखनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, नई मेटल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की स्थापना और नए मैनेजमेंट के तहत लेखांकन और अनुपालन संबंधी विसंगतियों के समाधान पर अपडेट महत्वपूर्ण होंगे।
