Shivom Investment & Consultancy Ltd कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से बाहर आ गई है और अब मेटल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में कदम रखने की तैयारी कर रही है। हालांकि, कंपनी के शेयर अभी भी ट्रेडिंग के लिए सस्पेंड हैं।
इंसॉल्वेंसी के बाद नई राह पर Shivom Investment
Shivom Investment & Consultancy Ltd ने आखिरकार कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने 18 अगस्त 2025 को कंपनी के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दे दी। अब कंपनी नए मैनेजमेंट के तहत काम कर रही है और अपने बिजनेस मॉडल को नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) से बदलकर मेटल मैन्युफैक्चरिंग की ओर ले जा रही है।
वित्तीय स्थिति और प्रदर्शन
वित्तीय वर्ष 2023-24 में, कंपनी का टोटल इनकम सिर्फ ₹0.17 करोड़ रहा, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष 2022-23 में यह ₹3.52 करोड़ था। कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में ₹0.49 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया है। CIRP के अधीन होने के कारण, 2023-24 में कंपनी का कोई एक्टिव बिजनेस ऑपरेशन नहीं था, और वित्तीय नतीजे केवल पुराने अकाउंटिंग और एडमिनिस्ट्रेटिव खर्चों को दर्शाते हैं।
क्यों अहम है यह बदलाव?
यह Shivom Investment के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है क्योंकि कंपनी खुद को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रही है। मेटल मैन्युफैक्चरिंग की ओर रणनीतिक बदलाव एक बड़ा कदम है। लेकिन, अभी भी कई चुनौतियाँ बाकी हैं। कंपनी के शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर नॉन-कम्प्लायंस के कारण सस्पेंड हैं। इसके अलावा, ऑडिट रिपोर्ट में कुछ चिंताएं जताई गई हैं, खासकर इंटरनल कंट्रोल्स और ऐतिहासिक डेटा की इंटीग्रिटी को लेकर। इन सब वजहों से निवेशकों के लिए अनिश्चितता बनी हुई है।
पिछली कहानी
पहले NBFC के तौर पर काम करने वाली Shivom Investment CIRP से गुजरी है। FY 2023-24 की एनुअल रिपोर्ट बताती है कि इस दौरान कोई सक्रिय बिजनेस ऑपरेशन नहीं हुआ। कंपनी पहले भी रेगुलेटरी जांच के दायरे में रही है, जिसमें SEBI द्वारा गलत वित्तीय स्टेटमेंट और फंड के दुरुपयोग के आरोप में जुर्माना लगाया गया था।
आगे क्या?
CIRP खत्म होने के बाद, नया मैनेजमेंट रेजोल्यूशन प्लान को लागू करने और कंपनी को मेटल मैन्युफैक्चरिंग की ओर ले जाने का लक्ष्य रखे हुए है। इसमें रेगुलेटरी फाइलिंग्स को नियमित करना, ट्रेडिंग सस्पेंशन को हटाने के लिए नॉन-कम्प्लायंस को दूर करना और नए ऑपरेशनल फ्रेमवर्क स्थापित करना शामिल है। कंपनी का भविष्य इस रणनीतिक बदलाव की सफलता और बाजार का विश्वास वापस जीतने की क्षमता पर निर्भर करेगा।
जोखिमों पर नजर
निवेशकों के लिए सबसे बड़े जोखिमों में ट्रेडिंग का लंबा सस्पेंशन शामिल है, जो शेयरधारकों के लिए लिक्विडिटी को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। ऑडिट में मिली खामियां, जैसे ग्रेच्युटी का प्रावधान न करना, रेजोल्यूशन प्लान के प्रभाव की अस्पष्ट अकाउंटिंग और पुराने अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स का उपयोग, चिंता का विषय हैं। इसके अलावा, ऐतिहासिक वित्तीय रिकॉर्ड तक सीमित पहुंच बैलेंस शीट की सटीकता पर अनिश्चितता पैदा करती है। कमजोर इंटरनल फाइनेंशियल कंट्रोल्स भी एक मुद्दा हैं।
आगे क्या ट्रैक करें?
निवेशकों को कंपनी द्वारा ट्रेडिंग सस्पेंशन को हटाने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। इसमें लिस्टिंग फीस का भुगतान और प्रक्रियात्मक नॉन-कम्प्लायंस को ठीक करना शामिल है। मेटल मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस की सफल स्थापना और विस्तार महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, इंटरनल कंट्रोल्स में सुधार, ऑडिटर की चिंताओं का समाधान और Ind AS रिपोर्टिंग में ट्रांजिशन की दिशा में कंपनी के प्रयासों को ट्रैक करना भी जरूरी होगा।
