Shivom Investment: दिवालिया प्रक्रिया खत्म, अब मेटल मैन्युफैक्चरिंग में उतरेगी कंपनी, लेकिन ऑडिटर की चेतावनी!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Shivom Investment: दिवालिया प्रक्रिया खत्म, अब मेटल मैन्युफैक्चरिंग में उतरेगी कंपनी, लेकिन ऑडिटर की चेतावनी!

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Shivom Investment & Consultancy Ltd ने अपनी कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। कंपनी अब मेटल मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ रही है, लेकिन उसे ऑडिटर की राय (Disclaimer of Opinion) और BSE पर ट्रेडिंग सस्पेंशन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

Shivom Investment & Consultancy Ltd: दिवालिया प्रक्रिया से मेटल मैन्युफैक्चरिंग तक, ऑडिटर की चिंताओं के बीच

कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए ₹2.88 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया है, जो पिछले साल के ₹3.70 करोड़ से कम है। कुल आय ₹3.50 करोड़ रही, जो पिछले साल के ₹3.87 करोड़ से घटी है।

निवेशकों के लिए खास: नई मैन्युफैक्चरिंग शुरुआत में दम दिख रहा है, लेकिन ऑडिटर की राय और ट्रेडिंग सस्पेंशन बड़े जोखिम पैदा करते हैं।

क्या हुआ?

Madhya Pradesh High Court के आदेशों के अनुसार, Shivom Investment & Consultancy Ltd ने अपनी कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) पूरी कर ली है। NCLT ने 18 अगस्त, 2025 को कंपनी के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी। यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि कंपनी अब निष्क्रिय NBFC से निकलकर मेटल और मेटल-आधारित उत्पादों के मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में कदम रख रही है।

हालांकि, कंपनी के स्टैंडअलोन फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स के लिए FY 2025-26 में उसके ऑडिटर M/s. S Parth & Co. ने 'डिसक्लेमर ऑफ ओपिनियन' (Disclaimer of Opinion) यानी राय देने से मना कर दिया है। ऑडिटर ने ऐतिहासिक रिकॉर्ड कीपिंग की समस्याओं और मैनेजमेंट में बदलाव के कारण पर्याप्त ऑडिट एविडेंस न मिलने का हवाला दिया है। साथ ही, इंटरनल फाइनेंशियल कंट्रोल्स में गंभीर कमजोरियों को उजागर किया है।

आंकड़ों की बात करें तो, FY 2025-26 में Shivom Investment ने कुल ₹3.4966 करोड़ की आय और ₹0.6118 करोड़ का कुल खर्च दर्ज किया, जिससे ₹2.8848 करोड़ का आफ्टर-टैक्स मुनाफा हुआ। वहीं, FY 2024-25 में कुल आय ₹3.8702 करोड़ और आफ्टर-टैक्स मुनाफा ₹3.7018 करोड़ था।

कंपनी की BSE पर ट्रेडिंग पिछले मैनेजमेंट द्वारा लिस्टिंग फीस का भुगतान न करने के कारण अभी भी सस्पेंड है।

यह क्यों मायने रखता है?

निवेशकों के लिए, CIRP का पूरा होना नए मैनेजमेंट के तहत एक नई शुरुआत का संकेत देता है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उतरना विकास के नए रास्ते खोल सकता है। लेकिन, ऑडिटर की राय वर्तमान वित्तीय आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है और गवर्नेंस व कंट्रोल से जुड़ी समस्याओं को दर्शाती है। ट्रेडिंग का सस्पेंशन शेयरधारकों के लिए लिक्विडिटी को रोकता है और अनुपालन से जुड़ी अनसुलझी समस्याओं का संकेत देता है।

पृष्ठभूमि

Shivom Investment & Consultancy Ltd इंसॉल्वेंसी को हल करने की प्रक्रिया, यानी CIRP से गुजर रही थी। कंपनी अब एक नई स्ट्रेटेजिक दिशा और पुनर्गठित बोर्ड के साथ इस प्रक्रिया से बाहर आई है। फोकस निष्क्रिय नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अपनी पहचान बनाने की ओर शिफ्ट हो गया है।

अब क्या बदलेगा?

कंपनी अब कैपिटल रीस्ट्रक्चरिंग के जरिए डेट-फ्री कैपिटल स्ट्रक्चर के तहत काम कर रही है। सफल रेजोल्यूशन एप्लीकेंट (SRA) को नए शेयर जारी किए गए हैं। नया मैनेजमेंट भविष्य के विस्तार के लिए शेयरधारकों से ₹500 करोड़ तक की उधारी सीमा और ₹200 करोड़ तक की निवेश/गारंटी सीमा बढ़ाने की मंजूरी मांग रहा है। बोर्ड का भी पुनर्गठन किया गया है, जिसमें रवि धीरजलाल वागाड़िया को मैनेजिंग डायरेक्टर और प्रशांत घनश्यामभाई उकानी को CFO/एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बनाया गया है।

जोखिम

  • ऑपरेशनल सेटअप: कंपनी को अभी अपनी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी स्थापित करनी है, जिसमें जमीन अधिग्रहण, मशीनरी खरीद और नियामक मंजूरी जैसे एग्जीक्यूशन जोखिम शामिल हैं।
  • ट्रेडिंग सस्पेंशन: BSE पर शेयर ट्रेडिंग सस्पेंड है, जिससे लिक्विडिटी और निवेशकों की पहुंच प्रभावित हो रही है।
  • ऑडिटर डिसक्लेमर: पर्याप्त ऑडिट एविडेंस न मिलने से वित्तीय पारदर्शिता और इंटरनल कंट्रोल्स को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

पीयर कंपेरिजन

जैसे-जैसे Shivom Investment मेटल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में प्रवेश कर रही है, उसके भविष्य के प्रदर्शन की तुलना इस उद्योग के स्थापित खिलाड़ियों से की जाएगी। हालांकि, वर्तमान में कंपनी के शून्य वाणिज्यिक संचालन और ट्रेडिंग सस्पेंशन को देखते हुए सीधी तुलना मुश्किल है। इस सेक्टर में विभिन्न धातुओं के उत्पादन और प्रसंस्करण में लगी कंपनियां शामिल हैं।

महत्वपूर्ण तारीखें

  • CIRP अप्रूवल: 18 अगस्त, 2025
  • रिपोर्टिंग अवधि: FY 2025-26
  • AGM की तारीख: 7 जुलाई, 2026

आगे क्या देखें?

निवेशकों को कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशंस स्थापित करने की प्रगति, BSE ट्रेडिंग सस्पेंशन को हटाने की समय-सीमा, और ऑडिटर की चिंताओं को दूर करने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। 7 जुलाई, 2026 को होने वाली आगामी एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) विस्तार योजनाओं पर अपडेट के लिए महत्वपूर्ण होगी।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.