Shivom Investment: दिवालियापन से वापसी! अब मेटल प्रोडक्ट्स बनाएगी कंपनी, जानें पूरी कहानी

INDUSTRIAL-GOODSSERVICES
Whalesbook Corporate News Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
Shivom Investment: दिवालियापन से वापसी! अब मेटल प्रोडक्ट्स बनाएगी कंपनी, जानें पूरी कहानी

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

Shivom Investment & Consultancy Ltd. ने NCLT की मंजूरी के बाद कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। कंपनी अब NBFC बिजनेस से हटकर मेटल प्रोडक्ट्स बनाने के क्षेत्र में उतर रही है, हालांकि अभी कॉमर्शियल ऑपरेशंस शुरू नहीं हुए हैं।

दिवालियापन से बाहर निकली Shivom Investment, बदला बिजनेस

Shivom Investment & Consultancy Ltd. ने आखिरकार नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) से राहत पा ली है। 18 अगस्त, 2025 को NCLT ने कंपनी के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दे दी, जिसके साथ ही कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) सफलतापूर्वक खत्म हो गया है।

क्या हुआ है?

कंपनी अब नए मैनेजमेंट के हाथ में है और इसने अपने बिजनेस का एजेंडा भी बदल दिया है। पहले NBFC (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी) के तौर पर काम करने वाली Shivom Investment अब मेटल प्रोडक्ट्स बनाने के कारोबार में कदम रख रही है। हालांकि, इस नए वेंचर में अभी कॉमर्शियल ऑपरेशंस शुरू होने बाकी हैं।

यह क्यों मायने रखता है?

इन्सॉल्वेंसी (दिवालियापन) के दौर से गुजरने के बाद यह कंपनी के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट है। नए नेतृत्व के तहत एक नए इंडस्ट्री में उतरना कंपनी को फिर से खड़ा करने का एक रास्ता दिखा सकता है, लेकिन अतीत के मुद्दे अभी भी एक बड़ी चुनौती हैं।

कंपनी की पुरानी कहानी

Shivom Investment पहले भी कई गंभीर वित्तीय और गवर्नेंस की समस्याओं से जूझ चुकी है। कंपनी के इक्विटी शेयर्स BSE पर ट्रेडिंग के लिए सस्पेंड हैं, जो लिस्टिंग फीस और अन्य प्रोसीजरल कारणों से हुआ है। इससे पहले, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने कंपनी पर ₹20 लाख का जुर्माना भी लगाया था। BSE की फोरेंसिक ऑडिट में भी गवर्नेंस की खामियां सामने आई थीं, जैसे कि फर्जी फाइनेंशियल स्टेटमेंट और गलत निवेश की जानकारी देना।

अब क्या बदलेगा?

NCLT की मंजूरी के बाद, कंपनी नए मैनेजमेंट के अधीन है। अब सारा फोकस मेटल प्रोडक्ट मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ऑपरेशंस स्थापित करने पर होगा। हालांकि, सबसे पहली चुनौती ट्रेडिंग सस्पेंशन को हटाना और पिछलीগুলোর अनुपालन (compliance) की दिक्कतों को दूर करना है।

किन जोखिमों पर नजर रखें?

मुख्य जोखिमों में लगातार जारी ट्रेडिंग सस्पेंशन, भारी संचित घाटा (₹63.27 करोड़ 31 मार्च, 2024 तक), और स्टेटुटरी ऑडिटर द्वारा अकाउंटिंग में विचलन और इंटरनल कंट्रोल्स में कमजोरी पर दी गई क्वालिफाइड राय शामिल है। इसके अलावा, अभी तक ऑपरेशंस शुरू न होना भी एक अहम फैक्टर है।

भविष्य में क्या देखें?

निवेशक मेटल प्रोडक्ट मैन्युफैक्चरिंग में कॉमर्शियल ऑपरेशंस के शुरू होने की खबरों पर बारीकी से नजर रखेंगे। BSE पर ट्रेडिंग सस्पेंशन का हटना और इंटरनल कंट्रोल्स व स्टेटुटरी कंप्लायंस को मजबूत करने की दिशा में प्रगति जैसे डेवलपमेंट ट्रैक करने लायक होंगे।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.