Shiva Granito Export Ltd ने FY26 के लिए **₹5.80 लाख** का नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया है, जो पिछले साल के प्रॉफिट (Profit) के मुकाबले बड़ा झटका है। कंपनी के ऑडिट पर भी सवाल उठे हैं, जिससे गवर्नेंस को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
Shiva Granito के नतीजे
Shiva Granito Export Ltd ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर (FY26) के लिए ₹5.80 लाख का नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया है। पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) में कंपनी ने ₹2.48 लाख का प्रॉफिट (Profit) कमाया था।
हालांकि, कंपनी के रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस (Revenue from Operations) में 36.4% की जोरदार बढ़ोतरी हुई और यह ₹11.73 करोड़ तक पहुंच गया। लेकिन, खर्चों में हुई बढ़ोतरी इतनी ज्यादा थी कि रेवेन्यू ग्रोथ भी मुनाफे में नहीं बदल पाई और कंपनी को घाटा उठाना पड़ा। कंपनी की बेसिक अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी घटकर ₹(0.04) हो गई है।
ऑडिट पर उठे गंभीर सवाल
फाइनेंशियल नतीजों से भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि कंपनी को एक बार फिर ऑडिटर से क्वालिफाइड ओपिनियन (Qualified Opinion) मिला है। इसका मतलब है कि ऑडिटर को वित्तीय नतीजों की विश्वसनीयता पर संदेह है। ये चिंताएं 2024 से बनी हुई हैं और ट्रेड रिसीवेबल्स (Trade Receivables), इन्वेंट्री वैल्यूएशन (Inventory Valuation) और अनप्रोविजन्ड लायबिलिटीज़ (Unprovided Liabilities) से जुड़ी हैं।
पीछे की कहानी
यह पहली बार नहीं है जब Shiva Granito अपने वित्तीय रिपोर्टिंग को लेकर जांच के दायरे में आई है। बार-बार क्वालिफाइड ऑडिट ओपिनियन मिलने का मतलब है कि कंपनी के अकाउंटिंग प्रैक्टिस या इंटरनल कंट्रोल में लगातार समस्याएँ बनी हुई हैं। ऑडिटर इन्वेंट्री वैल्यूएशन को वेरिफाई करने में असमर्थ रहा है और कंपनी पर ऐसे बड़े ट्रेड रिसीवेबल्स के लिए प्रोविजन (Provision) नहीं बनाने का आरोप है, जिससे क्रेडिट लॉस (Credit Loss) का खतरा हो सकता है।
आगे क्या?
निवेशकों को इन वित्तीय आंकड़ों को सावधानी से देखना चाहिए। कंपनी का नेट लॉस और बैलेंस शीट की पोजीशन (31 मार्च 2026 तक ₹37.42 करोड़ के एसेट्स, ₹23.94 करोड़ की इक्विटी) ऑडिटर के दिए गए चेतावनियों के साथ पेश की गई हैं। मैनेजमेंट का कहना है कि उन्हें क्रेडिट लॉस की उम्मीद नहीं है और वे बाकी मामलों का 'ध्यान रखेंगे', लेकिन ये जवाब काफी सामान्य हैं।
जोखिम
यहां सबसे बड़े जोखिम कंपनी के गवर्नेंस और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े हैं। ऑडिटर का इन्वेंट्री वैल्यूएशन वेरिफाई न कर पाना एक बड़ी रेड फ्लैग (Red Flag) है। ₹7.74 करोड़ के बड़े ट्रेड रिसीवेबल्स पर एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस प्रोविजन न बनाना, जो कि अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स के खिलाफ है, अनिश्चितता पैदा करता है। इसके अलावा, MSME भुगतान में देरी पर अनप्रोविजन्ड इंटरेस्ट (Unprovided Interest) और ग्रेच्युटी लायबिलिटी (Gratuity Liability) भी गवर्नेंस पर सवाल खड़े करती है।
जरूरी आंकड़े
- रेवेन्यू: FY26 में 36.4% बढ़कर ₹11.73 करोड़ हुआ (FY25 में ₹8.60 करोड़ था)।
- नेट प्रॉफिट: FY25 के ₹2.48 लाख के प्रॉफिट से FY26 में ₹5.80 लाख के लॉस में बदला।
- ट्रेड रिसीवेबल्स (अनप्रोविजन्ड): ₹7.74 करोड़।
- ऑडिट क्वालिफिकेशन्स: FY24 से लगातार जारी।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को Shiva Granito की भविष्य की फाइलिंग्स पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मैनेजमेंट ऑडिटर की चिंताओं को कितनी प्रभावी ढंग से दूर करता है। इन्वेंट्री वैल्यूएशन, ट्रेड रिसीवेबल्स के लिए प्रोविजनिंग और अनप्रोविजन्ड लायबिलिटीज़ को लेकर अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स का पालन करने के लिए उठाए गए ठोस कदमों पर खास ध्यान देना होगा। अगले रिपोर्ट्स में ऑडिट ओपिनियन में सुधार कंपनी के लिए महत्वपूर्ण होगा।
