Shish Industries के लिए फाइनेंशियल ईयर **2026** मिला-जुला रहा। जहां कंपनी का रेवेन्यू **15.6%** बढ़कर **₹134.39 करोड़** हो गया, वहीं कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण नेट प्रॉफिट **16.86%** गिरकर **₹7.26 करोड़** रह गया।
मुनाफे पर क्यों लगा ब्रेक?
कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए अपनी एनुअल रिपोर्ट जारी कर दी है। रेवेन्यू में 15.60% की बढ़त के बावजूद बॉटम लाइन पर दबाव साफ दिख रहा है। बोर्ड ने इस साल कोई डिविडेंड (Dividend) न देने का फैसला लिया है, ताकि कैश को भविष्य की ग्रोथ के लिए सुरक्षित रखा जा सके।
कॉरपोरेट हलचल और एक्विजिशन
विस्तार की रणनीति के तहत, कंपनी ने जून 2025 में Shish Advanced Composites Private Limited में 65% हिस्सेदारी ₹6.50 लाख में खरीदी है। इसके अलावा, कंपनी ने नॉन-प्रमोटर्स को 81.14 मिलियन फुली कन्वर्टिबल इक्विटी वारंट्स ₹12.00 प्रति वारंट की दर से जारी किए हैं, जिनकी मैच्योरिटी अगस्त 2027 में होगी।
गवर्नेंस और चुनौतियां
निवेशकों की चिंता का एक बड़ा कारण CFO का पद खाली रहना है। कंपनी जून 2025 से मार्च 2026 के बीच बिना स्थायी CFO के काम कर रही थी। कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और इस प्रशासनिक कमी को दूर करना कंपनी के मैनेजमेंट के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले समय में कंपनी की नजर इस परफॉर्मेंस को सुधारने और नए CFO की नियुक्ति पर होगी।
