Shilchar Technologies ने FY26 के लिए ₹158.16 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया है, जो पिछले साल से 7.70% ज्यादा है। कंपनी ने ₹12.50 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देने का ऐलान किया है और अपनी क्षमता का विस्तार भी कर रही है। अच्छी बात यह है कि कंपनी पर कोई कर्ज नहीं है।
Shilchar Technologies का शानदार प्रदर्शन, FY26 में ₹158 करोड़ से ज्यादा मुनाफा
Shilchar Technologies ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अपने नतीजे पेश कर दिए हैं। कंपनी ने ₹158.16 करोड़ का शुद्ध लाभ (Net Profit After Tax) दर्ज किया है, जो निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। कंपनी की ऑपरेशन से आय (Revenue from Operations) ₹651.94 करोड़ रही और प्रति शेयर आय (EPS) ₹138.25 दर्ज की गई।
शेयरधारकों को मिलेगा ₹12.50 प्रति शेयर का डिविडेंड
बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने शेयरधारकों को बड़ी खुशखबरी देते हुए ₹12.50 प्रति इक्विटी शेयर के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है। यह कंपनी के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन का एक और प्रमाण है।
क्षमता विस्तार पर कंपनी का फोकस
Shilchar Technologies सिर्फ मौजूदा प्रदर्शन पर ही नहीं रुकी है, बल्कि भविष्य की ग्रोथ के लिए बड़े कदम उठा रही है। कंपनी अपनी सबसे बड़ी क्षमता विस्तार परियोजना गवासद (Gavasad) सुविधा पर कर रही है। इसका लक्ष्य अप्रैल 2027 तक 14,000 MVA की कुल क्षमता हासिल करना है, जिसमें 6,500 MVA की अतिरिक्त क्षमता जोड़ी जाएगी। इस विस्तार से कंपनी 220 kV क्लास के प्रोडक्ट सेगमेंट में भी प्रवेश कर पाएगी।
कर्ज-मुक्त कंपनी और भविष्य की योजनाएं
कंपनी की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह पूरी तरह से कर्ज-मुक्त (Debt-free) है और अपनी विस्तार योजनाओं के लिए अपने कैश रिजर्व का उपयोग कर रही है। पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में, FY 2025-26 में कंपनी की नेट सेल्स/आय में 4.62% की वृद्धि हुई, जो ₹623.15 करोड़ से बढ़कर ₹651.94 करोड़ हो गई। वहीं, नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स में 7.70% का इजाफा हुआ।
निर्यात में भी बढ़ोतरी
वित्तीय वर्ष 2025-26 में, कंपनी के कुल रेवेन्यू में निर्यात (exports) का हिस्सा 48% रहा, जो पिछले वर्ष के 43% से अधिक है। कंपनी के पास FY27 के लिए लगभग ₹800 करोड़ का मजबूत ऑर्डर विजिबिलिटी भी है।
किन जोखिमों पर नजर रखें?
हालांकि कंपनी का प्रदर्शन मजबूत है, निवेशकों को कुछ जोखिमों पर भी ध्यान देना चाहिए। ट्रांसफार्मर ऑयल और कॉपर जैसे कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, खासकर फिक्स्ड-प्राइस कॉन्ट्रैक्ट्स पर मुनाफे को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार नीति की अनिश्चितताएं सप्लाई चेन को बाधित कर सकती हैं और निर्यात को प्रभावित कर सकती हैं।
