Sharvaya Metals ने सितंबर 2026 को समाप्त हुई छमाही के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं, जहां कंपनी का रेवेन्यू **99%** बढ़कर **₹179.06 करोड़** पर पहुंच गया है। हालांकि, कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण कंपनी का नेट प्रॉफिट मामूली घटकर **₹9.11 करोड़** रहा।
मुनाफे पर क्यों लगा ब्रेक?
कंपनी का कारोबार तेजी से विस्तार कर रहा है, लेकिन इसका सीधा असर मुनाफे पर नहीं दिख रहा है। इसका मुख्य कारण कच्चे माल (Raw Material) की बढ़ती लागत है, जो बढ़कर ₹158.30 करोड़ हो गई है, जबकि पिछले साल यह ₹80.38 करोड़ थी। बढ़ते खर्चों के कारण कंपनी की अर्निंग पर शेयर (EPS) भी गिरकर ₹9.08 पर आ गई है, जो पहले ₹9.36 थी।
कर्ज का बढ़ता बोझ
बैलेंस शीट पर गौर करें तो कंपनी अपनी ग्रोथ को फंड करने के लिए भारी कर्ज ले रही है। 30 सितंबर 2026 तक कंपनी की कुल देनदारियां (Total Liabilities) बढ़कर ₹122.43 करोड़ हो गई हैं। कंपनी के लॉन्ग-टर्म बोरोइंग्स ₹7.38 करोड़ और शॉर्ट-टर्म बोरोइंग्स ₹11.70 करोड़ तक पहुंच गए हैं, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकते हैं।
आगे क्या?
निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि मैनेजमेंट मार्जिन को कैसे मैनेज करता है। क्या कंपनी अपनी रेवेन्यू ग्रोथ को मुनाफे में बदल पाएगी, यह आने वाली तिमाहियों में पता चलेगा। ध्यान दें, डेजिग्नेटेड व्यक्तियों के लिए ट्रेडिंग विंडो 9 नवंबर, 2026 को फिर से खुल जाएगी।
