संपत्ति बेचकर कमाए ₹72.6 करोड़
Shah Alloys ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए ₹72.60 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट रिपोर्ट किया है। यह मुनाफा मुख्य रूप से एकमुश्त संपत्ति बिक्री और कर्ज निपटान से हुआ है। कंपनी ने अगस्त 2025 में अपने सांतेज, कलोल स्थित आयरन और स्टील प्लांट को टेक्नोलॉजी पुरानी होने और लागत बढ़ने के कारण स्थायी रूप से बंद कर दिया था।
कंपनी की असलियत: मुनाफे का गणित
हालांकि कंपनी का प्रॉफिट ₹72.60 करोड़ दिख रहा है, लेकिन यह एक बार की आय से बढ़ा है। प्लांट और मशीनरी, रोलिंग मिल की बिक्री से ₹90 करोड़ से ज्यादा का फायदा हुआ। इसके अलावा, HDFC बैंक से मिली ₹7.24 करोड़ की छूट ने भी इसमें योगदान दिया।
क्यों यह खबर अहम है?
यह मजबूत प्रॉफिट कंपनी के मुख्य बिजनेस से नहीं आया है। मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का स्थायी रूप से बंद होना और ऑडिटर का 'गोइंग कंसर्न' (यानी कंपनी के भविष्य में चलते रहने की क्षमता) पर राय न देना, कंपनी की असल वित्तीय स्थिति पर सवाल खड़े करता है।
प्लांट बंद होने की कहानी
सांतेज, कलोल स्थित प्लांट अगस्त 2025 में बंद हो गया था। इसके पीछे की वजह पुरानी टेक्नोलॉजी और प्रोडक्शन की हाई कॉस्ट बताई गई। तब से कंपनी अपनी संपत्ति बेचकर देनदारियों को चुकाने और वित्तीय स्थिति को संभालने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। Shah Alloys ने अपनी सहयोगी कंपनी SAL Steel Ltd. में भी अपनी हिस्सेदारी बेच दी थी।
आगे क्या बदलेगा?
मैन्युफैक्चरिंग प्लांट बंद होने के बाद, कंपनी की कमाई अब मुख्य रूप से संपत्ति बेचने जैसे नॉन-ऑपरेशनल एक्टिविटीज से होगी। प्रोडक्शन से ध्यान हटकर संपत्ति और देनदारियों के मैनेजमेंट पर आ गया है। HDFC बैंक के साथ हुए सेटलमेंट से ₹7.24 करोड़ की देनदारी माफ होने से कर्ज का बोझ कम हुआ है।
जोखिम जिन पर नजर रखें
सबसे बड़ा जोखिम यह है कि स्टेट्यूटरी ऑडिटर कंपनी के 'गोइंग कंसर्न' स्टेटस पर अपनी राय नहीं दे पा रहे हैं। इसका कारण लगातार हो रहे घाटे और मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशंस का बंद होना है। इसके अलावा, कंपनी की फिक्स्ड एसेट्स का बीमा नहीं होने से अनहोनी घटनाओं से नुकसान का खतरा बना हुआ है। लेनदारों, देनदारों और एडवांसेज के कन्फर्म न हुए बैलेंस भी भविष्य में एडजस्टमेंट का जोखिम पैदा करते हैं।
प्रदर्शन की तुलना
हालांकि फाइलिंग में पीयर कंपनियों का स्पेसिफिक फाइनेंशियल डेटा नहीं दिया गया है, लेकिन ऑपरेशनल क्लोजर और एसेट सेल की रणनीति Shah Alloys को स्टील सेक्टर की उन कंपनियों से अलग करती है जो सक्रिय रूप से बढ़ रही हैं। जो कंपनियां आधुनिकीकरण और क्षमता विस्तार पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, उनसे इसकी तुलना करना मुश्किल है।
मुख्य आंकड़े (एक नजर में)
31 मार्च 2026 को समाप्त हुए साल के लिए, स्टैंडअलोन रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस ₹37.27 करोड़ रहा। ₹72.60 करोड़ के नेट प्रॉफिट में ₹53.48 करोड़ (प्लांट और मशीनरी बिक्री), ₹16.92 करोड़ (रोलिंग मिल बिक्री), और ₹13.98 करोड़ (SAL Steel शेयर्स की बिक्री) के एक्सेप्शनल गेन शामिल हैं।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को कंपनी की संपत्ति के इस्तेमाल, कर्ज प्रबंधन और भविष्य की किसी भी संभावित ऑपरेशनल योजनाओं से संबंधित आगे की किसी भी जानकारी पर करीब से नजर रखनी चाहिए। ऑडिटर की अगली रिपोर्ट 'गोइंग कंसर्न' स्टेटस को समझने के लिए महत्वपूर्ण होगी।
