Schneider Electric Infrastructure के FY26 के नतीजे
Schneider Electric Infrastructure ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने ऑडिटेड नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने इस दौरान ₹2,890.63 करोड़ का रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस दर्ज किया, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) के ₹2,636.71 करोड़ की तुलना में 9.6% ज़्यादा है।
मुनाफे में क्यों आई गिरावट?
हालांकि, रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद, कंपनी का नेट प्रॉफिट 20.6% घटकर ₹212.56 करोड़ पर आ गया। पिछले साल यह ₹267.89 करोड़ था। इसी तरह, प्रॉफिट बिफोर टैक्स भी 16.8% घटकर ₹291.58 करोड़ रहा।
इस मुनाफे की गिरावट का एक मुख्य कारण ₹14.17 करोड़ का एक एक्सेप्शनल चार्ज है। यह चार्ज नए लेबर कोड लागू होने के कारण ग्रेच्युटी पर हुए पास्ट सर्विस कॉस्ट से संबंधित है।
नतीजों का मतलब
रेवेन्यू में हुई बढ़ोतरी कंपनी के प्रोडक्ट्स और सर्विसेज की डिमांड को दर्शाती है। लेकिन, रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद प्रॉफिट में कमी यह बताती है कि कंपनी के खर्चे सेल्स से ज़्यादा बढ़े हैं, जिससे मार्जिन पर दबाव पड़ा है। एक्सेप्शनल चार्ज रेगुलेटरी बदलावों का प्रॉफिट पर पड़ने वाले असर को भी दिखाता है।
आगे क्या?
कंपनी ने मिस्टर उदय सिंह को मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (MD/CEO) के तौर पर 3 साल के लिए फिर से अपॉइंट किया है, जो 15 सितंबर 2026 से लागू होगा। यह री-अपॉइंटमेंट शेयरहोल्डर्स की मंजूरी पर निर्भर है और इससे मैनेजमेंट में स्थिरता आएगी।
इसके अलावा, शेयरहोल्डर्स को Schneider Electric IT Business India Private Limited के साथ मटेरियल रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन्स पर एक पोस्टल बैलट के जरिए वोटिंग करनी होगी।
निवेशकों के लिए खास बातें
- रेवेन्यू: ₹2,890.63 करोड़ (FY26) vs ₹2,636.71 करोड़ (FY25) - +9.6%
- नेट प्रॉफिट: ₹212.56 करोड़ (FY26) vs ₹267.89 करोड़ (FY25) - -20.6%
- बेसिक और डाइल्यूटेड ईपीएस (EPS): ₹8.89 (FY26) vs ₹11.20 (FY25) - -20.6%
- एक्सेप्शनल चार्ज (FY26): ₹14.17 करोड़
निवेशकों को अब कंपनी की कॉस्ट मैनेजमेंट परफॉर्मेंस और रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन्स के नतीजों पर नज़र रखनी चाहिए।
