Salasar Techno Engineering के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कंपनी की **₹98.31 करोड़** की संपत्ति को प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत कुर्क कर दिया है। यह कार्रवाई PMLA कानून के तहत की गई है, जिसमें कंपनी के भिलाई प्लांट और एक सोलर फैसिलिटी को शामिल किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 12 सितंबर, 2026 को Salasar Techno Engineering Limited के खिलाफ प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) जारी किया है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 5(1) के तहत यह आदेश दिया गया है, जिसके चलते अगले 180 दिनों तक कंपनी इन संपत्तियों को न तो बेच सकती है और न ही इनका ट्रांसफर कर सकती है।
किन संपत्तियों पर असर?
ED की इस कार्रवाई में कुल ₹98.31 करोड़ की संपत्ति को फ्रीज किया गया है, जबकि इनका कुल मार्केट वैल्यू ₹167.99 करोड़ बताया जा रहा है। इसमें मुख्य रूप से:
- भिलाई मैन्युफैक्चरिंग प्लांट: ₹40.95 करोड़
- सोलर पावर प्लांट (पूर्व में EMC Limited के पास): ₹57.36 करोड़
मैनेजमेंट का क्या कहना है?
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि कंपनी या उसके प्रमुख मैनेजमेंट—चेयरमैन आलोक कुमार और मैनेजिंग डायरेक्टर शशांक अग्रवाल—के खिलाफ ED की ओर से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है। मैनेजमेंट पूरी तरह से जांच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहा है और सभी जरूरी दस्तावेज जमा करा दिए गए हैं।
ऑपरेशंस पर असर?
निवेशकों के लिए राहत की बात यह है कि कंपनी का दावा है कि उनके रोजमर्रा के कामकाज (Day-to-day operations) पर इस कानूनी कार्रवाई का कोई असर नहीं पड़ा है। यह घटना 16 अप्रैल, 2025 को ED द्वारा की गई सर्च का ही अगला चरण है, जिसकी जानकारी पहले ही शेयर बाजारों को दे दी गई थी। हालांकि, PMLA के तहत हो रही इस जांच को लेकर निवेशकों को अगले 180 दिनों तक कंपनी के कानूनी घटनाक्रमों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
