Sakthi Sugars Share: कमाई बढ़ी पर घाटा भी गहराया, शेयरधारकों के लिए क्या है खबर?

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AuthorMehul Desai|Published at:
Sakthi Sugars Share: कमाई बढ़ी पर घाटा भी गहराया, शेयरधारकों के लिए क्या है खबर?

Sakthi Sugars ने जून तिमाही में ₹381.38 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है। लेकिन, कंपनी का नेट लॉस बढ़कर ₹1.83 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹1.10 करोड़ था। इस बीच, कंपनी ने मैनेजमेंट में अहम नियुक्तियों को भी मंजूरी दी है।

Sakthi Sugars के नतीजे: कमाई बढ़ी, पर घाटा भी बढ़ा

Sakthi Sugars Limited ने चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही (30 जून 2026 को समाप्त) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी की टोटल इनकम (कुल आय) बढ़कर ₹381.38 करोड़ हो गई, जो पिछले साल की इसी अवधि में ₹305.97 करोड़ थी। यह 24.67% की जोरदार बढ़ोतरी है।

लेकिन, रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद, कंपनी का नेट लॉस (शुद्ध घाटा) बढ़कर ₹1.83 करोड़ हो गया। पिछले साल की पहली तिमाही में यह घाटा ₹1.10 करोड़ था। इसी तरह, बेसिक ईपीएस (Earnings Per Share) भी गिरकर (₹0.15) हो गया, जो पिछले साल (₹0.09) था। कंपनी के ऑपरेशंस से होने वाली आय भी ₹302.42 करोड़ से बढ़कर ₹376.91 करोड़ हो गई।

क्यों बढ़ी चिंता?

रेवेन्यू में बड़ी बढ़ोतरी के बावजूद घाटे का बढ़ना, कंपनी के लिए चिंता का विषय हो सकता है। इससे पता चलता है कि शायद कंपनी की कॉस्ट (खर्च) बढ़ गई है या प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव है। निवेशकों को अब यह समझना होगा कि आखिर ऐसा क्यों हुआ।

मैनेजमेंट में स्थिरता

इस नतीजों के बीच, कंपनी ने मैनेजमेंट में कुछ अहम नियुक्तियों को भी हरी झंडी दे दी है। श्री एम. बालासुब्रमणियम को मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और श्री एम. श्रीनिवासन को ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर (Joint MD) के तौर पर पांच साल के लिए फिर से नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति 27 अगस्त 2026 से प्रभावी होगी और शेयरधारकों की मंजूरी पर निर्भर करेगी। यह कदम कंपनी के ऑपरेशनल मैनेजमेंट में स्थिरता बनाए रखने का संकेत देता है।

श्री एस. चंद्रशेखर को एडिशनल नॉन-एग्जीक्यूटिव नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के रूप में नियुक्त किया जाएगा, जिस पर आगामी एजीएम (AGM) में वोटिंग होगी। श्रीमती आर. जेयश्री को इंटरनल ऑडिट डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आगे क्या देखना होगा?

ऑडिटर्स ने बताया है कि 'अन्य आय' (Other Income) में ₹0.66 करोड़ का एक हिस्सा को-जनरेशन यूनिट्स के टैरिफ रिवीजन से जुड़ा है, जो तमिलनाडु इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (TNERC) के अगले ऑर्डर पर निर्भर करेगा। यह राशि कितनी वसूल होगी, यह अभी तय नहीं है, जो एक जोखिम हो सकता है।

निवेशकों को अब आगामी एजीएम के नतीजों पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही, कंपनी की लागत प्रबंधन और लाभप्रदता (Profitability) सुधारने की रणनीतियों पर भी ध्यान देना होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.