Sadbhav Engineering पर संकट के बादल गहरा गए हैं। कंपनी के स्टेट्यूटरी ऑडिटर M/s. Manubhai & Shah LLP ने इस्तीफा दे दिया है। साथ ही, कंपनी ने **₹8.59 करोड़** का स्टैंडअलोन नेट लॉस दर्ज किया है और ऑपरेशंस में भारी गिरावट के कारण 'गोइंग कंसर्न' को लेकर चेतावनी जारी की गई है।
ऑडिटर का इस्तीफा और बढ़ती मुश्किलें
Sadbhav Engineering के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कंपनी ने जानकारी दी है कि उनके स्टेट्यूटरी ऑडिटर, M/s. Manubhai & Shah LLP ने 4 नवंबर, 2026 से अपना पद छोड़ दिया है। ऑडिटर ने इसके पीछे कंपनी के गिरते ऑपरेशंस और अनसुलझी अकाउंटिंग चिंताओं का हवाला दिया है।
नतीजों में दिखी वित्तीय कमजोरी
कंपनी ने सितंबर तिमाही (Q2 FY27) के जो नतीजे पेश किए हैं, वे काफी चिंताजनक हैं। स्टैंडअलोन रेवेन्यू सिर्फ ₹36.93 करोड़ रहा है। हालांकि कंसोलिडेटेड नतीजे ₹63.87 करोड़ के प्रॉफिट में दिखे, लेकिन पैरेंट कंपनी की हेल्थ को लेकर एक्सपर्ट्स चिंतित हैं क्योंकि स्टैंडअलोन स्तर पर घाटा जारी है।
क्यों है 'गोइंग कंसर्न' का खतरा?
ऑडिटर्स ने कंपनी की सब्सिडियरीज जैसे Sadbhav Infrastructure Project Limited (SIPL) और Rohtak Panipat Tollway Private Limited (RPTPL) में किए गए निवेश और लोन की रिकवरी पर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा, बंद पड़े प्रोजेक्ट्स से जुड़े ₹350.19 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट एसेट्स की वैल्यू पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया गया है।
निवेशकों के लिए बड़ी चेतावनी
फिलहाल कंपनी के पास कोई नया EPC कॉन्ट्रैक्ट नहीं है, जिससे कैश फ्लो का संकट गहरा गया है। कर्ज चुकाने और सप्लायर्स के पेमेंट को लेकर कंपनी 'गोइंग कंसर्न' यानी अस्तित्व बनाए रखने की चुनौती से जूझ रही है। आने वाले समय में नए ऑडिटर की नियुक्ति और डेट रिस्ट्रक्चरिंग की प्रक्रिया पर निवेशकों की नजर होना बेहद जरूरी है।
