Sadbhav Engineering ने दो नए स्वतंत्र डायरेक्टर (Independent Directors) की नियुक्ति की है और कंपनी के ऑथराइज्ड कैपिटल (Authorized Capital) को दोगुना करने का प्रस्ताव भी दिया है। लेकिन, जून 2026 तिमाही के नतीजे बताते हैं कि कंपनी को बड़ा नुकसान हुआ है और ऑडिटर (Auditors) ने संपत्ति की वसूली और कंपनी के चलते रहने की क्षमता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
Sadbhav Engineering Ltd: बोर्ड में फेरबदल और वित्तीय संकट
Sadbhav Engineering Ltd का जून 30, 2026 को समाप्त हुई तिमाही में स्टैंडअलोन रेवेन्यू (Standalone Revenue) ₹20.34 करोड़ रहा, जो पिछले साल इसी अवधि के ₹33.02 करोड़ से काफी कम है। कंपनी ने इस तिमाही में ₹9.73 करोड़ का नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया है, जबकि पिछले साल यह घाटा सिर्फ ₹0.42 करोड़ था। बेसिक और डाइल्यूटेड ईपीएस (EPS) ₹(0.57) रहा, जो पिछले साल ₹(0.02) था।
क्या हुआ है?
Sadbhav Engineering Ltd के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने श्री दीप प्रकाश पटेल (Mr. Jaldeep Prakash Patel) और श्री अंकित किशोरभाई शाह (Mr. Ankit Kishorbhai Shah) को नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स (Non-Executive Independent Directors) के तौर पर अतिरिक्त डायरेक्टर नियुक्त किया है। ये नियुक्तियां 13 अगस्त, 2026 से प्रभावी होंगी और इन्हें शेयरधारकों की मंजूरी भी चाहिए होगी। बोर्ड ने कंपनी की ऑथराइज्ड शेयर कैपिटल (Authorized Share Capital) को ₹50 करोड़ से बढ़ाकर ₹100 करोड़ करने का भी प्रस्ताव दिया है, जिसके लिए शेयरधारकों और नियामकों (Regulators) की मंजूरी जरूरी होगी।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
नए स्वतंत्र डायरेक्टर्स की नियुक्ति से कंपनी के कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) पर फोकस बढ़ने के संकेत मिलते हैं। वहीं, ऑथराइज्ड कैपिटल बढ़ाने का प्रस्ताव भविष्य में फंड जुटाने की तैयारी हो सकती है, जिससे कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत हो सके। हालांकि, ये सकारात्मक कदम कंपनी के खराब वित्तीय प्रदर्शन और ऑडिटर द्वारा उठाए गए गंभीर सवालों के सामने फीके पड़ गए हैं।
बैकस्टोरी
Sadbhav Engineering पिछले कुछ समय से वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही है। जून 30, 2026 को समाप्त तिमाही के स्टैंडअलोन वित्तीय नतीजों में रेवेन्यू में भारी गिरावट और नेट लॉस में बढ़ोतरी देखी गई है।
अब क्या बदलेगा?
नए डायरेक्टर्स बोर्ड को स्वतंत्र निगरानी प्रदान करेंगे। अगर कैपिटल बढ़ाने का प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो कंपनी को वित्तीय रूप से थोड़ी राहत मिल सकती है। शेयरधारकों को अगली जनरल मीटिंग में इन प्रस्तावों पर वोट करना होगा।
जोखिम जिन पर नजर रखें
स्टैट्युटरी ऑडिटर (Statutory Auditors) ने वित्तीय नतीजों पर एक क्वालिफाइड निष्कर्ष (Qualified Conclusion) दिया है। मुख्य चिंताओं में एक स्टेप-डाउन सब्सिडियरी (Rohtak Panipat Tollway Private Limited) से मिलने वाले लोन (Loans) और रिसीवेबल्स (Receivables) की वसूली और Sadbhav Infrastructure Project Limited के इम्पेयरमेंट असेसमेंट (Impairment Assessment) शामिल हैं। ऑडिटर ने बंद हो चुके प्रोजेक्ट्स से जुड़े ₹350.19 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट एसेट्स (Contract Assets) पर भी सवाल उठाए हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि ऑडिटर ने कंपनी के 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) यानी चलते रहने की क्षमता पर एक मटेरियल अनिश्चितता (Material Uncertainty) जताई है, क्योंकि कंपनी के पास एक्टिव ईपीसी कॉन्ट्रैक्ट्स (EPC Contracts) नहीं हैं और कैश इनफ्लो (Cash Inflows) भी नहीं हो रहा है।
आगे क्या देखना है?
निवेशकों को डायरेक्टर्स की नियुक्ति और कैपिटल बढ़ाने के प्रस्तावों पर होने वाली जनरल मीटिंग पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। कंपनी की यह क्षमता कि वह ऑडिटर द्वारा उठाए गए संपत्ति वसूली और गोइंग कंसर्न जैसे मुद्दों को कैसे संबोधित करती है, और भविष्य के कॉन्ट्रैक्ट्स व फंड जुटाने की उसकी क्या योजनाएं हैं, यह सब महत्वपूर्ण होगा।
