SPML Infra की FY26 में रिकवरी: BESS विस्तार से ग्रोथ की उम्मीद
SPML Infra ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) की चौथी तिमाही और पूरे साल के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने Q4 FY26 में ₹293.9 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जबकि पूरे वित्तीय वर्ष के लिए यह आंकड़ा ₹868 करोड़ रहा। पूरे FY26 के लिए नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) ₹76 करोड़ रहा, वहीं EBITDA ₹86 करोड़ दर्ज किया गया, जो 9.7% का मार्जिन दर्शाता है। Q4 FY26 की शुरुआत में कंपनी की कंसोलिडेटेड ऑर्डर बुक ₹5,369 करोड़ थी।
क्यों मायने रखता है यह नतीजा?
ये नतीजे SPML Infra के लिए एक रिकवरी का संकेत देते हैं। कंपनी अपनी 'SPML 2.0' रणनीति पर सक्रिय रूप से काम कर रही है, जिसमें लाभप्रदता और फंडिंग के आधार पर प्रोजेक्ट्स का चयन किया जा रहा है। एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) मैन्युफैक्चरिंग में विस्तार है, जिसके लिए पुणे में 2.5 GW की क्षमता वाली एक नई असेंबली फैसिलिटी स्थापित की जा रही है, जिसका लक्ष्य 5 GW क्षमता तक पहुंचना है। एनर्जी स्टोरेज सेक्टर में यह डाइवर्सिफिकेशन भविष्य की कमाई के लिए महत्वपूर्ण है और भारत की रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने की पहल के अनुरूप है।
कंपनी की पिछली स्थिति
SPML Infra फिलहाल डेट (Debt) के समाधान की अवधि से गुजर रही है। कंपनी की NARCL के साथ एक स्ट्रक्चर्ड रिपेमेंट प्लान है, जिसके तहत मार्च 2026 तक ₹380 करोड़ का बकाया था। डेट सर्विसिंग काफी हद तक आर्बिट्रेशन अवार्ड्स (Arbitration Awards) की वसूली से जुड़ी हुई है। लिक्विडिटी (Liquidity) को मजबूत करने के लिए, कंपनी ने मई 2024 से ₹476 करोड़ जुटाए हैं, जिसमें प्रमोटर के योगदान से ₹313.5 करोड़ शामिल हैं।
अब क्या बदलेगा?
कंपनी का फोकस अगले 2-3 सालों में पुराने ऑर्डर्स को पूरा करने पर है, साथ ही 'SPML 2.0' के तहत नए प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी जा रही है। BESS मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार एक नया ग्रोथ वर्टिकल खोलेगा। मैनेजमेंट का अनुमान है कि आने वाले प्रोजेक्ट्स के डिजाइन अप्रूवल के कारण FY27 में रेवेन्यू और प्रॉफिट में कम से कम 25% की ग्रोथ देखने को मिलेगी।
जोखिम क्या हैं?
NARCL के साथ बकाया राशि के निपटान के लिए आर्बिट्रेशन अवार्ड्स पर निर्भरता, कानूनी प्रक्रियाओं की अनिश्चितताओं के कारण एक महत्वपूर्ण जोखिम प्रस्तुत करती है। इसके अलावा, कंपनी की रेवेन्यू विजिबिलिटी (Revenue Visibility) प्रोजेक्ट्स के लिए सरकारी फंड की उपलब्धता से जुड़ी हुई है, हालांकि 'SPML 2.0' रणनीति सुरक्षित फंडिंग वाले प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित करके इसे कम करने का लक्ष्य रखती है।
आगे क्या देखना होगा
निवेशक BESS फैसिलिटी के एग्जीक्यूशन (Execution) की प्रगति और 'SPML 2.0' मॉडल के तहत नए प्रोजेक्ट्स हासिल करने की कंपनी की क्षमता पर बारीकी से नजर रखेंगे। आर्बिट्रेशन अवार्ड्स की वसूली और ऋण में कमी पर उनका प्रभाव भी महत्वपूर्ण संकेतक होंगे।
