SK Minerals की दमदार परफॉरमेंस: रेवेन्यू ₹318 करोड़ के पार
SK Minerals & Additives Limited ने वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) के लिए शानदार नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 50% बढ़कर ₹318 करोड़ हो गया है। सिर्फ रेवेन्यू ही नहीं, कंपनी की EBITDA मार्जिन में भी सुधार हुआ है, जो FY25 के 9% से बढ़कर 10% हो गई है। इसी तरह, प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) मार्जिन भी 5% से बढ़कर 6% तक पहुंच गया है।
रेवेन्यू में इतनी बड़ी बढ़ोतरी की वजह?
कंपनी के मैनेजमेंट के मुताबिक, इस शानदार प्रदर्शन के पीछे मुख्य वजह बिक्री की मात्रा (Sales Volume) में करीब 39.4% की बढ़ोतरी और कच्चे माल की कीमतों (Raw Material Prices) में आई तेजी है। बिक्री की मात्रा बढ़कर 46,000 मीट्रिक टन हो गई है। कंपनी के पास ₹55 करोड़ का ऑर्डर बुक भी है, जिसमें से ₹42 करोड़ सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स से जुड़े हैं, जो आने वाले समय में रेवेन्यू को सपोर्ट करेगा।
भविष्य की रणनीति: हाई-मार्जिन मैन्युफैक्चरिंग की ओर कदम
SK Minerals अपने फूड और फीड सेगमेंट को लगभग 95% क्षमता पर चला रही है। भविष्य की ग्रोथ को देखते हुए, कंपनी अगले 12-18 महीनों में अपनी कुल क्षमता को बढ़ाकर 18,000 मीट्रिक टन करने की योजना बना रही है। एक बड़ी और रणनीतिक पहल के तहत, कंपनी पॉलीमर एडिटिव्स (Polymer Additives) के क्षेत्र में कदम रख रही है, खासकर हैलोजन-फ्री फ्लेम रिटार्डेंट्स (Halogen-free flame retardants)। मैनेजमेंट का मानना है कि यह एक हाई-मार्जिन 'ब्लू ओशन' (Blue Ocean) अवसर है।
कंपनी में क्या बदल रहा है?
SK Minerals अपने कुल रेवेन्यू में मैन्युफैक्चरिंग सेगमेंट के योगदान को मौजूदा 23% से बढ़ाकर अगले 2-3 सालों में 50% करने पर जोर दे रही है। कंपनी FY27-FY28 के लिए ₹20 करोड़ के पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) की योजना भी बना रही है। जल्द ही, यानी अगले 3 महीनों में एक नया पॉलीमर एडिटिव प्लांट शुरू होने की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए चिंताएं क्या हैं?
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता कंपनी का वर्किंग कैपिटल साइकिल है, जो फिलहाल 110 दिनों पर है। हालांकि, कंपनी इनवॉइस डिस्काउंटिंग के जरिए इसे कम करने के प्रयास कर रही है। इसके अलावा, भू-राजनीतिक जोखिमों (Geopolitical Risks) के कारण सप्लाई चेन में रुकावटों से कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। नए पॉलीमर एडिटिव्स प्लांट में शुरुआती ऑपरेशनल दिक्कतें भी आ रही हैं, जिन्हें ठीक होने में 3-6 महीने लग सकते हैं।
आगे क्या देखना महत्वपूर्ण होगा?
निवेशकों को नए पॉलीमर एडिटिव प्लांट्स में ऑपरेशनल समस्याओं का समाधान, कंपनी की वर्किंग कैपिटल साइकिल को कम करने की क्षमता और हाई-मार्जिन मैन्युफैक्चरिंग की ओर रणनीतिक बदलाव की प्रगति पर नजर रखनी चाहिए।
