SIS Ltd ने रिकॉर्ड ₹15,982 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया है, जो **21.2%** बढ़ा है। वहीं, EBITDA **19%** बढ़कर ₹717 करोड़ रहा। हालांकि, नए लेबर कोड से जुड़े एक बार के स्टैट्यूटरी एडजस्टमेंट के कारण नेट प्रॉफिट प्रभावित हुआ है।
SIS Ltd FY26 नतीजे: रेवेन्यू में उछाल, लेबर कोड एडजस्टमेंट से प्रॉफिट पर असर
कंसोलिडेटेड रेवेन्यू: ₹15,982 करोड़ (21.2% ग्रोथ)
कंसोलिडेटेड EBITDA: ₹717 करोड़ (19% ग्रोथ)
निवेशकों के लिए खास: कंपनी के ऑपरेशनल विस्तार से रेवेन्यू में जोरदार ग्रोथ, लेकिन एक बार के खर्चों से रिपोर्टेड प्रॉफिट प्रभावित।
क्या हुआ?
SIS Limited ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने रिकॉर्ड ₹15,982 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू हासिल किया, जो पिछले साल की तुलना में 21.2% की बड़ी बढ़ोतरी दिखाता है। कंसोलिडेटेड EBITDA में भी 19% का इजाफा हुआ और यह ₹717 करोड़ रहा। हालांकि, रिपोर्ट किए गए प्रॉफिट पर एक बार के असाधारण स्टैट्यूटरी एडजस्टमेंट का असर पड़ा है, जो कि नवंबर 2025 में घोषित नए लेबर कोड के संबंध में ग्रेच्युटी और लीव लायबिलिटी प्रोविजन्स से जुड़ा था।
क्यों मायने रखता है?
रेवेन्यू और EBITDA में मजबूत ग्रोथ कंपनी के सिक्योरिटी सॉल्यूशंस (इंडिया और इंटरनेशनल) और फैसिलिटी मैनेजमेंट सेगमेंट में बढ़ते परिचालन को दर्शाती है। टेक्नोलॉजी-एनेबल्ड 'मैन-टेक' मॉडल पर फोकस, जिसमें AI सर्विलांस और ऑटोमेटेड मैनेजमेंट शामिल हैं, सेवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने की रणनीतिक दिशा को दिखाता है। हालांकि प्रॉफिट पर एक बार का असर हुआ है, यह इस क्षेत्र पर रेगुलेटरी बदलावों के संभावित प्रभाव को भी उजागर करता है।
बैकस्टोरी
SIS Limited अपनी 'विजन 2030' रणनीति पर काम कर रही है, जिसका लक्ष्य कंपनी को मैनपावर-हेवी मॉडल से टेक्नोलॉजी-ड्रिवेन सर्विस प्रोवाइडर में बदलना है। इसमें एडवांस्ड सर्विलांस और फैसिलिटी मैनेजमेंट टेक्नोलॉजीज में निवेश शामिल है। कंपनी ने हालिया डिविडेंड और बायबैक के जरिए शेयरधारकों को रिटर्न देने पर भी ध्यान केंद्रित किया है। नए लेबर कोड इंडस्ट्री में कर्मचारी-संबंधी देनदारियों पर महत्वपूर्ण रेगुलेटरी बदलाव लाते हैं।
अब क्या बदलेगा?
मैनेजमेंट को उम्मीद है कि अगले वित्तीय वर्ष में प्रॉफिटेबिलिटी सामान्य हो जाएगी, जिससे एक बार के स्टैट्यूटरी एडजस्टमेंट का दबाव कम होगा। कंपनी अपनी टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन योजनाओं को जारी रखेगी। नेतृत्व में बदलाव, जिसमें श्रीमती रीटा किशोर सिन्हा की एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन के तौर पर नियुक्ति और प्रमुख मैनेजमेंट कर्मियों के रेमुनरेशन में संशोधन शामिल हैं, के लिए शेयरधारकों की मंजूरी की आवश्यकता होगी।
जोखिम
निवेशक अगले वित्तीय वर्ष में प्रॉफिट नॉर्मलाइजेशन पर बारीकी से नजर रखेंगे, क्योंकि लेबर कॉस्ट में बदलाव का मार्जिन पर प्रभाव आंका जाएगा। कैश लॉजिस्टिक्स बिजनेस के लिए डेफर (deferred) किया गया IPO भविष्य में वैल्यू अनलॉक करने की क्षमता के लिहाज से देखने लायक रहेगा।
पीयर कंपैरिजन
हालांकि फाइलिंग में विशिष्ट पीयर नतीजों का विवरण नहीं दिया गया है, SIS Limited की व्यापक रेवेन्यू ग्रोथ और टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन पर फोकस सिक्योरिटी और फैसिलिटी मैनेजमेंट सर्विसेज सेक्टर में इसे अलग पहचान देता है। नए लेबर कानूनों का प्रभाव एक सेक्टर-व्यापी चिंता है जो प्रतिस्पर्धियों को भी समान रूप से प्रभावित करेगा।
कॉन्टेक्स्ट मेट्रिक्स
FY26 के लिए कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹15,982 करोड़ रहा, जबकि FY25 में यह ₹13,189 करोड़ था।
FY26 के लिए कंसोलिडेटेड EBITDA ₹717 करोड़ था, जो FY25 के ₹604 करोड़ की तुलना में अधिक है।
FY26 के लिए ऑपरेटिंग PAT ₹428 करोड़ रहा।
रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (RoCE) 16.5% और रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) 15.8% रहा।
कंपनी ने FY26 में डिविडेंड और बायबैक के जरिए लगभग ₹250 करोड़ वापस किए।
नेट डेट-टू-EBITDA रेशियो 1 से कम है।
आगे क्या ट्रैक करें?
शेयरधारकों को कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ की रफ्तार बनाए रखने की क्षमता, अपनी 'विजन 2030' रणनीति के सफल कार्यान्वयन और असाधारण एडजस्टमेंट के बाद प्रॉफिट नॉर्मलाइजेशन पर नजर रखनी चाहिए। कैश लॉजिस्टिक्स IPO पर प्रगति भी एक महत्वपूर्ण डेवलपमेंट रहेगी।
