SEPC Ltd के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। मद्रास हाई कोर्ट के आदेश के बाद कंपनी ने कई कानूनी विवादों को सुलझा लिया है। इस समझौते से कंपनी के **₹154 करोड़** के अटके हुए फंड का रास्ता साफ हो गया है और बैंकिंग पाबंदियां भी हटा दी गई हैं।
कानूनी बाधा खत्म, लिक्विडिटी को मिली संजीवनी
SEPC Ltd ने मद्रास हाई कोर्ट के साथ हुए एक महत्वपूर्ण समझौते (Joint Memo of Compromise) के जरिए अपनी पुरानी कानूनी उलझनों को पूरी तरह खत्म कर लिया है। कोर्ट के 30 सितंबर, 2026 के आदेश के बाद, तमाम पेंडिंग एग्जीक्यूशन याचिकाओं को अब बंद कर दिया गया है।
कंपनी के खजाने पर नहीं पड़ेगा असर
इस डील की सबसे खास बात यह है कि कंपनी को अपनी जेब से पैसा खर्च नहीं करना पड़ा। ₹149.5 करोड़ का जो सेटलमेंट अमाउंट है, उसका पूरा भुगतान एक थर्ड पार्टी द्वारा किया जा रहा है, जो कि 2015 के एक पुराने इंडेमनिटी एग्रीमेंट (Indemnity Agreement) के तहत तय था। इसका मतलब है कि कंपनी की अपनी कैश रिजर्व सुरक्षित बनी रहेगी।
आगे की राह (Outlook)
इस खबर के बाद कंपनी की वर्किंग कैपिटल (Working Capital) स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। बैंकिंग पाबंदियां हटने से कंपनी अब अपने रोजाना के ऑपरेशंस को बेहतर ढंग से मैनेज कर पाएगी। निवेशकों के लिए अब देखने वाली बात यह होगी कि इस नई लिक्विडिटी का इस्तेमाल कंपनी अपने आने वाले प्रोजेक्ट्स की रफ्तार बढ़ाने के लिए कैसे करती है।
