SEPC Ltd ने अपना फाइनेंशियल ईयर 2025-26 का सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट जारी किया है, जिसमें कंपनी का टर्नओवर **₹579.09 करोड़** रहा है। हालांकि, निवेशकों के लिए एक बड़ी चिंता वाली खबर यह है कि मद्रास हाईकोर्ट ने कंपनी के **₹154.63 करोड़** के ट्रेड रिसीवेबल्स को अटैच कर दिया है, जो कंपनी के कुल रिसीवेबल्स का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है।
फाइनेंशियल और सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट की मुख्य बातें
SEPC Ltd ने अपनी ताजा फाइलिंग में बताया है कि कंपनी का नेट वर्थ ₹1,880.46 करोड़ है। बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट (BRSR) के अनुसार, कंपनी ने सालाना ₹579.09 करोड़ का टर्नओवर रिपोर्ट किया है।
कानूनी पेंच और रिसीवेबल्स पर असर
कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती कानूनी विवाद है। GPE (India) Ltd और अन्य बनाम Twarit Consultancy Services Private Ltd और SEPC Limited मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने एक अंतरिम आदेश दिया है। कंपनी के कुल ₹449.62 करोड़ के ट्रेड रिसीवेबल्स में से ₹154.63 करोड़ को कोर्ट ने अटैच कर दिया है। कंपनी का दावा है कि इस आदेश से कंपनी के कामकाज (Going Concern Status) पर कोई खतरा नहीं है, लेकिन वर्किंग कैपिटल पर इसका असर पड़ सकता है।
ऑपरेशंस और वर्कफोर्स अपडेट
कंपनी के पास फिलहाल 212 परमानेंट कर्मचारी और 160 वर्कर हैं। दिलचस्प बात यह है कि परमानेंट कर्मचारियों के छोड़कर जाने की दर (Turnover Rate) पिछले साल के 11% से बढ़कर इस साल 19% हो गई है। कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी साफ किया है कि फिलहाल भारी नुकसान के कारण उन पर CSR खर्च करने की बाध्यता नहीं है।
निवेशकों के लिए रिस्क फैक्टर
कंपनी का मैनेजमेंट भले ही ऑपरेशनल स्टेबिलिटी का दावा कर रहा है, लेकिन कुल रिसीवेबल्स के करीब 34% हिस्से का कानूनी रूप से फंसना शॉर्ट-टर्म लिक्विडिटी के लिए एक बड़ा रिस्क फैक्टर है। निवेशकों को आने वाले समय में कंपनी के कैश फ्लो और कोर्ट के अगले आदेशों पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
