Repro India Ltd: रिकॉर्ड रेवेन्यू और ज़मीन की बिक्री से FY27 तक कर्ज-मुक्त होने का लक्ष्य
Repro India Limited (RBL) ने वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) की चौथी तिमाही (Q4) में अपना अब तक का सबसे अधिक तिमाही रेवेन्यू ₹139.47 करोड़ दर्ज किया है। साथ ही, कंपनी ने अपनी महापे स्थित ज़मीन ₹282 करोड़ में सफलतापूर्वक बेच दी है।
क्या हुआ?
Repro India ने Q4 FY26 के वित्तीय नतीजे जारी किए, जिसमें ₹139.47 करोड़ का रिकॉर्ड तिमाही रेवेन्यू बताया गया है, जो पिछले साल की तुलना में 13.3% ज़्यादा है। पूरे वित्तीय वर्ष FY26 का रेवेन्यू ₹493.98 करोड़ रहा। कंपनी ने अपनी महापे की ज़मीन STT Global Data Centres India Pvt Ltd को ₹282 करोड़ में बेच दिया और इसका भुगतान 22 मई, 2026 को प्राप्त हो गया।
क्यों मायने रखता है?
यह रिकॉर्ड रेवेन्यू लगातार ग्रोथ को दिखाता है, खासकर डिजिटल सेगमेंट में, जो FY26 में 16% सालाना बढ़ा। ज़मीन की बिक्री से मिला भारी कैश इनफ्लो कंपनी की बैलेंस शीट को मजबूत करने की एक रणनीतिक चाल है। मैनेजमेंट का लक्ष्य FY27 तक कंपनी को कर्ज-मुक्त और फ्री-कैश-फ्लो-पॉजिटिव बनाना है।
बैकस्टोरी
Repro India एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है, जिसमें डिजिटल बिजनेस और 'पहले बेचो -> फिर उत्पादन करो' मॉडल पर जोर दिया जा रहा है ताकि वर्किंग कैपिटल को बेहतर बनाया जा सके। कंपनी का लक्ष्य नेगेटिव वर्किंग कैपिटल साइकिल हासिल करना है। महापे प्रॉपर्टी की बिक्री इस कर्ज कम करने की योजना का एक अहम हिस्सा है।
अब क्या बदलेगा?
ज़मीन की बिक्री से कर्ज चुकाने के लिए पर्याप्त लिक्विडिटी (तरलता) मिली है। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि Q1 FY27 का रेवेन्यू Q4 FY26 के स्तर के करीब रहेगा, जो लगातार मजबूत टॉप-लाइन परफॉर्मेंस और लगभग 20% सालाना ग्रोथ का संकेत देता है। अगले वित्तीय वर्ष में कर्ज-मुक्त और पॉजिटिव कैश फ्लो हासिल करने पर मुख्य ध्यान रहेगा।
जोखिम
रेवेन्यू में ग्रोथ के बावजूद, कंपनी ने Q4 FY26 में ₹11.26 करोड़ का नेट लॉस (शुद्ध घाटा) दर्ज किया और पूरे साल FY26 में ₹33.30 करोड़ का घाटा हुआ। मुनाफे पर हाई डेप्रिसिएशन (मूल्यह्रास) और MAT क्रेडिट के लिए ₹11 करोड़ के प्रोविजन का असर पड़ा। निवेशक बारीकी से देखेंगे कि क्या ऑपरेशनल एफिशिएंसी और कर्ज में कमी नेट प्रॉफिटेबिलिटी में तब्दील होती है।
आगे क्या देखना है?
निवेशकों को FY27 तक कंपनी के कर्ज-मुक्त और फ्री-कैश-फ्लो-पॉजिटिव लक्ष्य की दिशा में प्रगति पर नज़र रखनी चाहिए। कर्ज के स्तर में कमी, नेट प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार, और डिजिटल व प्लेटफॉर्म बिजनेस वर्टिकल में लगातार ग्रोथ जैसे प्रमुख मेट्रिक्स पर ध्यान देना होगा।
