Reliance Infrastructure की जॉइंट वेंचर कंपनी Mumbai Metro One Private Limited (MMOPL) पर दिवालिया होने का खतरा मंडरा रहा है। कंपनी को India Infrastructure Finance Co. (UK) Limited से **$182 मिलियन** की रिकवरी के लिए इंसॉल्वेंसी याचिका का सामना करना पड़ रहा है।
बिगड़ा कर्ज का गणित
Reliance Infrastructure के लिए मुसीबतें बढ़ती दिख रही हैं। कंपनी की जॉइंट वेंचर MMOPL के खिलाफ IBC की धारा 7 के तहत इंसॉल्वेंसी याचिका दायर की गई है। इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी (UK) लिमिटेड ने ब्याज समेत लगभग $182 मिलियन के भुगतान की मांग की है।
मामला यहीं नहीं थमा, कंपनी को एक और बड़ा झटका तब लगा जब नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) ने जुलाई 2026 में हुए मास्टर रीस्ट्रक्चरिंग एग्रीमेंट को रद्द कर दिया। इस एग्रीमेंट के रद्द होने की मुख्य वजह शर्तों का पूरा न होना बताया जा रहा है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
डेट रीस्ट्रक्चरिंग प्लान के फेल होने और कोर्ट में मामला जाने से MMOPL के सामने ऑपरेशनल चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। कंपनी ने हालांकि यह साफ किया है कि इस क्लेम का एक बड़ा हिस्सा विवादित है, लेकिन कानूनी लड़ाई शुरू होने से फाइनेंशियल अनिश्चितता बनी हुई है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने कहा है कि कंपनी पर इसका सटीक फाइनेंशियल असर बताना जल्दबाजी होगी। प्रबंधन कानूनी सलाह ले रहा है ताकि NCLT में अपना पक्ष मजबूती से रखा जा सके। निवेशकों को अब NCLT की अगली सुनवाई और कंपनी के कानूनी कदमों पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि यह मामला लंबी कानूनी खींचतान में बदल सकता है।
