Rathi Bars के निवेशकों को बड़ा झटका! ₹11.52 करोड़ का भारी घाटा, ऑपरेशन ठप, बैंक लोन डिफॉल्ट

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Rathi Bars के निवेशकों को बड़ा झटका! ₹11.52 करोड़ का भारी घाटा, ऑपरेशन ठप, बैंक लोन डिफॉल्ट
Overview

Rathi Bars ने FY26 के लिए **₹11.52 करोड़** का नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया है, जो पिछले साल के प्रॉफिट (Profit) की तुलना में बड़ी गिरावट है। इनकम टैक्स सर्च (Income Tax Search) और रेगुलेटरी पाबंदियों के चलते कंपनी का प्रोडक्शन बंद है, साथ ही कंपनी बैंक लोन और TReDS पेमेंट्स में डिफॉल्ट का सामना कर रही है।

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Rathi Bars को ₹11.52 करोड़ का भारी घाटा, प्रोडक्शन भी बंद

₹11.52 करोड़ का नेट लॉस
रेवेन्यू में 26% की गिरावट, ₹368.60 करोड़ पर पहुंचा

निवेशकों के लिए चेतावनी: घाटे, डिफॉल्ट और बंद ऑपरेशन से कंपनी गंभीर वित्तीय संकट में दिख रही है, और वापसी की राह अनिश्चित है।

**क्या हुआ?
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Rathi Bars Limited ने FY26 के लिए अपने ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स (Audited Financial Results) का ऐलान किया है। कंपनी को ₹11.52 करोड़ का नेट लॉस (Net Loss) हुआ है। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) में ₹2.57 करोड़ के प्रॉफिट (Profit) के मुकाबले एक बड़ा झटका है। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू (Operational Revenue) भी करीब 26% घटकर ₹368.60 करोड़ रह गया, जो FY25 में ₹496.29 करोड़ था।

**क्यों आई ये नौबत?
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कंपनी का मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) ऑपरेशन कई वजहों से बंद पड़ा है। इनमें दिसंबर 2025 में हुई इनकम टैक्स (Income Tax) की सर्च, NCR में GRAP स्टेज IV जैसी रेगुलेटरी पाबंदियां (Regulatory Restrictions) और बिजली की दरों में 25% की बढ़ोतरी शामिल है।

ऑपरेशनल दिक्कतों के साथ-साथ, Rathi Bars अपने बड़े कर्ज़ चुकाने में भी फेल हो गई है। कंपनी पर Axis Bank के कैश क्रेडिट (Cash Credit) के ₹60.08 करोड़ और Yes Bank के ₹19.68 करोड़ बकाया हैं। HDFC Bank का टर्म लोन (Term Loan) भी जनवरी 2026 से डिफॉल्ट में है, जिसकी बकाया राशि ₹4.07 करोड़ है। इतना ही नहीं, ₹64.21 करोड़ के इनवॉइस डिस्काउंटिंग फैसिलिटीज (Invoice Discounting Facilities) भी मुकदमेबाजी के तहत लंबित हैं और उनका भुगतान नहीं हुआ है।

**पृष्ठभूमि
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मार्च 2026 में खत्म हुआ यह फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) Rathi Bars के लिए बेहद मुश्किलों भरा रहा। प्रोडक्शन बंद होना और भारी-भरकम कर्ज़ व देनदारियों पर डिफॉल्ट (Default) कंपनी के गंभीर वित्तीय तनाव को दिखाता है। रिपोर्ट किए गए नुकसान के कारण कंपनी की नेट वर्थ (Net Worth) भी ₹96.49 करोड़ से घटकर ₹84.97 करोड़ रह गई है।

**आगे क्या बदलेगा?
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इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए, Rathi Bars ने प्रोफेशनल एडवाइजर (Professional Advisors) के तौर पर Ernst & Young (E&Y) और लीगल एडवाइजर (Legal Advisors) के तौर पर Menon & Associates को हायर किया है। ये फर्म्स कंपनी को रीस्ट्रक्चरिंग (Restructuring) और बैंकों के साथ बातचीत में मदद करेंगी। कंपनी ने ऑपरेशन्स फिर से शुरू करने की अनुमति के लिए राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) में एक रिट पिटीशन (Writ Petition) भी दायर की है।

जोखिम (Risks to Watch)

निवेशकों के लिए सबसे बड़ा जोखिम यह है कि कंपनी 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) यानी एक चालू व्यवसाय के तौर पर जारी रह पाएगी या नहीं। ऑडिटर (Auditor) ने भी इस पर सवाल उठाया है। क्वालिफाइड ऑडिट ओपिनियन (Qualified Audit Opinion), बैंक ड्यूज़ पर डिफॉल्ट, चल रही कानूनी लड़ाई और कंपनी सेक्रेटरी (Company Secretary) का पद खाली होना, ये सब गवर्नेंस (Governance) और ऑपरेशनल चिंताएं बढ़ाते हैं। कंपनी के रिवाइवल (Revival) के प्रयासों, जैसे कि डेट रीस्ट्रक्चरिंग (Debt Restructuring) और ऑपरेशन्स की बहाली, की सफलता महत्वपूर्ण होगी।

ऑडिटर और गवर्नेंस की टिप्पणियां

M/s MASAR & Co. ने फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स (Financial Statements) के लिए एक क्वालिफाइड ओपिनियन (Qualified Opinion) दिया है। इसके मुख्य कारण बैंक ड्यूज़ (Bank Dues) में डिफॉल्ट, बैंकों से कन्फर्मेशन की कमी, TReDS लिटिगेशन (Litigation) और इनकम टैक्स सर्च प्रोसीडिंग्स (Income Tax Search Proceedings) रहे। ऑडिटर की रिपोर्ट कंपनी की 'गोइंग कंसर्न' स्टेटस पर गंभीर संदेह जताती है। इसके अलावा, कंपनी सेक्रेटरी (Company Secretary) का पद 22 मार्च 2026 से खाली होने के कारण कंपनीज़ एक्ट, 2013 (Companies Act, 2013) के तहत फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स पर हस्ताक्षर करने संबंधी नियमों का पालन नहीं हो पा रहा है।

**अगला कदम क्या?
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निवेशकों को राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले, बैंकों के साथ डेट रीस्ट्रक्चरिंग (Debt Restructuring) की बातचीत में प्रगति और इनकम टैक्स सर्च (Income Tax Search) से जुड़े अपडेट्स पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। ऑपरेशन्स (Operations) की बहाली या फाइनेंशियल रीस्ट्रक्चरिंग (Financial Restructuring) में किसी भी सकारात्मक विकास से कंपनी के भविष्य की दिशा तय होगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.