R&B Denims लिमिटेड: FY26 में रेवेन्यू चमका, पर मुनाफा घटा
31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए R&B Denims लिमिटेड के नतीजे आ गए हैं। कंपनी ने स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड दोनों आधारों पर रेवेन्यू में जबरदस्त बढ़त दर्ज की है। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल के ₹366.78 करोड़ की तुलना में लगभग 27% बढ़कर ₹465.92 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, स्टैंडअलोन रेवेन्यू में भी करीब 23.3% की बढ़ोतरी देखी गई, जो ₹291.08 करोड़ रहा (FY25 में ₹236.14 करोड़).
मुनाफे पर पड़ी मार?
रेवेन्यू की शानदार ग्रोथ के बावजूद, मुनाफे के आंकड़े उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में करीब 31% की बड़ी गिरावट आई और यह ₹14.44 करोड़ रह गया (FY25 में ₹20.92 करोड़)। इसी तरह, कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में भी लगभग 9.9% की कमी दर्ज की गई, जो ₹24.76 करोड़ रहा (पिछले साल ₹27.47 करोड़)।
निवेशकों के लिए चिंता की बात
रेवेन्यू में बड़ी उछाल और मुनाफे में गिरावट का यह अंतर निवेशकों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। यह बताता है कि कंपनी को या तो अपने ऑपरेशनल खर्चों में भारी बढ़ोतरी का सामना करना पड़ रहा है, या फिर इनपुट कॉस्ट बढ़ने से कंपनी के मार्जिन पर दबाव बन रहा है। साफ है, कंपनी अपनी बिक्री बढ़ाने में तो सफल रही है, लेकिन उस बढ़ी हुई बिक्री से होने वाले मुनाफे को बनाए रखने में संघर्ष कर रही है।
कंपनी की पिछली रणनीति
हाल के सालों में, R&B Denims ने टेक्सटाइल सेक्टर, खासकर डेनिम मैन्युफैक्चरिंग में अपनी बाजार उपस्थिति और प्रोडक्शन स्केल बढ़ाने पर जोर दिया है। कंपनी की स्ट्रेटेजी प्रोडक्शन और रेवेन्यू को बढ़ाने की रही है। कंपनी ने अब सोलर और विंड एनर्जी की अलग रिपोर्टिंग बंद कर दी है, जिससे यह साफ है कि वे अपने मुख्य टेक्सटाइल बिजनेस पर फोकस करना चाहते हैं।
आगे क्या?
कंपनी ने FY 2026-27 के लिए M/s V. M. Patel & Associates को कॉस्ट ऑडिटर नियुक्त किया है। यह एक नियमित कॉर्पोरेट गवर्नेंस का कदम है। इसके अलावा, कंपनी 21 नवंबर, 2025 से लागू होने वाले नए लेबर कोड (Labour Codes) के असर का भी मूल्यांकन कर रही है। हालांकि अभी तक कोई खास असर नहीं दिखा है, लेकिन भविष्य में कर्मचारी देनदारियों (employee liability provisions) में बदलाव की संभावना बनी रहेगी।
किन जोखिमों पर नजर रखें?
सबसे बड़ा जोखिम यही है कि रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद मुनाफा कम हो रहा है, जो लगातार मार्जिन पर दबाव को दर्शाता है। निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी अपनी कॉस्ट स्ट्रक्चर को कितना प्रभावी ढंग से मैनेज कर पाती है। नए लेबर कोड का असर भी भविष्य में कंपनी के लिए एक संभावित जोखिम बन सकता है, अगर इससे प्रोविजनिंग में बड़े बदलाव करने पड़े।
