Ram Ratna Wires ने शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट (Net Profit) **51%** बढ़कर **₹108.32 करोड़** हो गया है, जिसका मुख्य कारण Bhiwadi फैसिलिटी का बेहतर प्रदर्शन है। कंपनी Q2 2026 तक CTC सेगमेंट में एंट्री की तैयारी में है और **₹2.50** प्रति शेयर का डिविडेंड (Dividend) देने की सिफारिश की है।
Ram Ratna Wires की शानदार परफॉरमेंस, विस्तार की तैयारी
Ram Ratna Wires Ltd. ने मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) के लिए अपने वित्तीय नतीजे जारी किए हैं। स्टैंडअलोन (Standalone) रेवेन्यू (Revenue) में 40% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹5,076.11 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, EBITDA में 66% का उछाल आकर यह ₹250.98 करोड़ रहा। कंपनी के प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 51% की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई, जो ₹108.32 करोड़ रहा।
कंसोलिडेटेड (Consolidated) आधार पर भी कंपनी का प्रदर्शन दमदार रहा। रेवेन्यू 41% बढ़कर ₹5,176.65 करोड़ हो गया, जबकि PAT पिछले साल के ₹70.20 करोड़ से बढ़कर ₹108.60 करोड़ पर आ गया।
भविष्य के लिए बड़ा दांव
कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए ₹2.50 प्रति इक्विटी शेयर (शेयर) का डिविडेंड (Dividend) देने की सिफारिश की है। इसके अलावा, Ram Ratna Wires साल 2026 की दूसरी तिमाही (Q2 2026) तक केबल इन केबल (CTC) सेगमेंट में उतरने की योजना बना रही है, जो कंपनी के लिए नए ग्रोथ के अवसर खोलेगा।
प्रदर्शन के पीछे की कहानी
कंपनी का यह शानदार प्रदर्शन मुख्य रूप से Bhiwadi मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के बेहतरीन प्रदर्शन और उत्पादन क्षमता में वृद्धि का नतीजा है। कंपनी ने अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और बाजार में अपनी पहुंच मजबूत करने के लिए रणनीतिक निवेश किए हैं।
निवेश पर रखें नज़र
हालांकि, कंपनी के प्रदर्शन में एक चिंता का विषय भी है - वह है कर्ज का बढ़ना। कंपनी का डेट-इक्विटी रेशियो (Debt-Equity Ratio) पिछले साल के 0.57 से बढ़कर 1.04 हो गया है। इसका मतलब है कि कंपनी पर कर्ज का बोझ बढ़ा है, जिससे उसके लोन चुकाने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। स्टैंडअलोन आधार पर कंपनी का इंटरेस्ट खर्चा ₹80.72 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹51.48 करोड़ था। निवेशकों को इस पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।
आगे क्या?
निवेशकों को कंपनी के कर्ज प्रबंधन, वर्किंग कैपिटल (Working Capital) एफिशिएंसी और नए CTC सेगमेंट के प्रदर्शन पर कड़ी नजर रखनी होगी। बढ़ते फाइनेंस कॉस्ट (Finance Cost) और कच्चे माल (Commodity) की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच मुनाफा बनाए रखने की कंपनी की क्षमता महत्वपूर्ण होगी।
