Rajratan Global Wire ने चेन्नई और थाईलैंड में अपनी क्षमता बढ़ाने का ऐलान किया है। कंपनी आने वाले 15 क्वार्टर में **15-20%** वॉल्यूम ग्रोथ की उम्मीद जता रही है, हालांकि बढ़ते इनपुट और लॉजिस्टिक खर्चों के कारण मुनाफे पर दबाव बना हुआ है।
क्षमता विस्तार और ग्रोथ की राह
कंपनी ने अपने चेन्नई प्लांट की क्षमता को इस तिमाही में बढ़ाकर 60,000 टन करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही, कंपनी थाईलैंड में भी 50,000 टन की अतिरिक्त क्षमता जोड़ने की तैयारी कर रही है, जिस पर ₹100 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) खर्च होगा। साथ ही, पीथमपुर में कंपनी का स्टील कॉर्ड प्रोजेक्ट अभी ट्रायल फेज में है, जिसके अगले साल पूरी तरह शुरू होने की उम्मीद है।
क्यों है ये महत्वपूर्ण?
मैनेजमेंट ने अगले 10 से 15 क्वार्टर तक साल-दर-साल 15-20% की वॉल्यूम ग्रोथ का मजबूत गाइडेंस दिया है। कंपनी का लक्ष्य है कि FY27 तक भारत और थाईलैंड से कुल एक्सपोर्ट 30,000 टन के पार पहुंच जाए। थाईलैंड की सुविधा कंपनी के लिए एक 'रणनीतिक संपत्ति' बनी हुई है क्योंकि वहां 'स्क्रैप-बेस्ड' रॉ मटेरियल आसानी से उपलब्ध है, जो ग्रीन बीड वायर बनाने में कंपनी को एक कॉम्पिटिटिव एज देता है।
निवेशकों के लिए जोखिम
ग्रोथ के आंकड़ों के बावजूद, कंपनी के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। एनर्जी, ट्रांसपोर्टेशन और रॉ मटेरियल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते EBITDA मार्जिन फिलहाल अपने निचले स्तर पर हैं। फ्रेट (माल ढुलाई) की अस्थिरता कंपनी के लिए एक बड़ा सरदर्द बनी हुई है, जो उत्पादन बढ़ाने से मिलने वाले मुनाफे को बेअसर कर रही है।
आगे क्या ट्रैक करें?
निवेशकों की नजरें अब पीथमपुर प्रोजेक्ट के सफल कमर्शियलाइजेशन पर होनी चाहिए। साथ ही, यह देखना अहम होगा कि जैसे-जैसे चेन्नई प्लांट पूरी क्षमता पर काम करेगा, क्या कंपनी बढ़ती लागत को ग्राहकों पर शिफ्ट कर पाएगी या नहीं।
