Rajoo Engineers ने Q2 FY27 के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का रेवेन्यू **10%** बढ़कर **₹101.91 करोड़** पर पहुंच गया है, लेकिन नेट प्रॉफिट में **41%** की बड़ी गिरावट देखी गई है।
नतीजों का विश्लेषण
राजू इंजीनियर्स (Rajoo Engineers) के लिए यह तिमाही मिली-जुली रही है। जहाँ कंपनी ने टॉप-लाइन में ग्रोथ दिखाई है, वहीं बॉटम-लाइन यानी मुनाफे पर गहरा असर पड़ा है। सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल के ₹92.25 करोड़ से बढ़कर ₹101.91 करोड़ हो गया है। इसके विपरीत, नेट प्रॉफिट पिछले साल के ₹14.10 करोड़ से घटकर महज ₹8.26 करोड़ पर सिमट गया है।
मार्जिन पर बढ़ता संकट
नतीजों में सबसे चिंताजनक पहलू EBITDA मार्जिन का आधा हो जाना है। यह पिछले साल के 19.84% से गिरकर महज 9.75% पर आ गया है। कंपनी के ऑपरेशनल खर्चों में बढ़ोत्तरी और प्राइसिंग पावर की कमी सीधे तौर पर मुनाफे को खा रही है। यदि हम H1 FY27 की बात करें, तो रेवेन्यू में 26.88% का उछाल तो आया है, लेकिन EBITDA में 14.19% की गिरावट एक स्थाई चुनौती की ओर इशारा कर रही है।
मैनेजमेंट का रुख और आगे की राह
मैनेजमेंट ने अपनी रणनीति में कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को प्राथमिकता देने की बात कही है। कंपनी लंबे समय के लिए मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी और प्रिंटिंग-कन्वर्टिंग इक्विपमेंट में निवेश जारी रखना चाहती है। हालांकि, मौजूदा हेडविंड्स के बावजूद लीडरशिप प्लास्टिक प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में अपनी पकड़ को लेकर आश्वस्त है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को अब अगली दो तिमाहियों पर बारीकी से नजर रखनी होगी। मार्जिन का दबाव अगर इसी तरह बना रहता है, तो यह कंपनी के बिजनेस मॉडल पर स्ट्रक्चरल सवाल खड़े कर सकता है। निवेशकों को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि क्या आने वाले समय में मैनेजमेंट बढ़ती लागत को कस्टमर्स पर पास कर पाएगा या प्रोडक्शन खर्चों को कम करने में सफल होगा।
