RJ Shah & Company के FY26 के नतीजे: रेवेन्यू पर बड़ा झटका, मुनाफे में गिरावट
RJ Shah & Company लिमिटेड ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए तिमाही और पूरे वित्तीय वर्ष के नतीजे घोषित कर दिए हैं। कंपनी के लिए यह साल काफी चुनौतीपूर्ण रहा, खासकर रेवेन्यू के मोर्चे पर। FY26 में कंपनी का रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स (Revenue from Operations) पिछले साल के ₹10.46 करोड़ की तुलना में 97.4% घटकर सिर्फ ₹0.27 करोड़ रह गया। यह साफ संकेत है कि कंपनी की मुख्य सिविल इंजीनियरिंग निर्माण गतिविधियों में लगभग ठहराव आ गया है।
मुनाफे का गणित: 'अन्य आय' का सहारा
ऑपरेशनल सुस्ती के बावजूद, कंपनी ने FY26 में ₹2.41 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो कि FY25 के ₹5.75 करोड़ की तुलना में 58.2% कम है। इस मुनाफे का बड़ा हिस्सा 'अन्य आय' (Other Income) से आया, जो 28.4% बढ़कर ₹2.30 करोड़ हो गया। यानी, कंपनी का मुनाफा काफी हद तक गैर-ऑपरेशनल स्रोतों पर निर्भर रहा।
निवेशकों के लिए क्यों अहम है ये नतीजे?
कोर रेवेन्यू में आई यह भारी गिरावट शेयरधारकों के लिए बड़ी चिंता का सबब है। इससे कंपनी के मुख्य व्यवसाय में बड़ी मंदी का पता चलता है। 'अन्य आय' पर मुनाफे की निर्भरता इसे अस्थिर बनाती है। इससे भी गंभीर बात यह है कि कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो (Operating Cash Flow) FY26 में ₹-1.34 करोड़ रहा, जो FY25 के पॉजिटिव ₹2.12 करोड़ के मुकाबले एक बड़ा उलटफेर है। यह लिक्विडिटी (Liquidity) की समस्या की ओर इशारा करता है।
पिछले साल की कहानी
FY25 में RJ Shah & Company का प्रदर्शन काफी मजबूत था। तब कंपनी ने ₹10.46 करोड़ का रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स और ₹5.75 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया था। साथ ही, ऑपरेटिंग कैश फ्लो भी पॉजिटिव था। मौजूदा नतीजे पिछले साल के मुकाबले बिलकुल उलट तस्वीर पेश करते हैं।
आगे क्या?
बोर्ड ने ₹10 फेस वैल्यू वाले शेयर पर ₹2.50 प्रति शेयर (यानी 25%) का फाइनल डिविडेंड (Dividend) देने की सिफारिश की है, जो शेयरधारकों की मंजूरी पर निर्भर करेगा। आंतरिक ऑडिटर (Internal Auditor) के तौर पर M/s. Brijesh Dutt & Associates को FY26-27 के लिए नियुक्त किया गया है। वैधानिक ऑडिटर (Statutory Auditors), NNK & Co. ने वित्तीय विवरणों पर एक स्पष्ट राय दी है और किसी लंबित मुकदमे का उल्लेख नहीं किया है।
बड़े जोखिम
RJ Shah & Company के लिए मुख्य जोखिमों में इसके मुख्य व्यवसाय के रेवेन्यू में लगभग खत्म हो जाना, ऑपरेटिंग कैश फ्लो में बड़ा निगेटिव बदलाव, और सबसे बड़ी बात यह है कि कंपनी के पास बैंक से स्वीकृत कोई वर्किंग कैपिटल सुविधा (Working Capital Facility) नहीं है। वर्किंग कैपिटल की कमी के चलते कंपनी के लिए अपने ऑपरेशन्स को फंड करना बेहद मुश्किल होगा।
भविष्य में क्या देखना होगा?
निवेशकों को कंपनी की उन रणनीतियों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए जिनसे मुख्य निर्माण व्यवसाय को फिर से पटरी पर लाया जा सके। साथ ही, ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाना और निगेटिव कैश फ्लो व वर्किंग कैपिटल की कमी से पैदा हुई लिक्विडिटी की समस्या को दूर करना भी अहम होगा। नए प्रोजेक्ट हासिल करने और ऑपरेशनल रेवेन्यू में सुधार करने की कंपनी की क्षमता महत्वपूर्ण साबित होगी।
