FY26 में Quest Flow Controls का नेट प्रॉफिट गिरकर ₹0.16 करोड़ रह गया है, जो पिछले साल ₹6.28 करोड़ था। हालांकि, कंपनी का ऑर्डर बुक ₹100 करोड़ के पार है और चाकन प्लांट की कैपेसिटी को 4 गुना बढ़ा दिया गया है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और चुनौतियां
कंपनी के स्टैंडअलोन ऑपरेशंस से रेवेन्यू ₹58.58 करोड़ रहा, जबकि नेट प्रॉफिट फिसलकर ₹0.16 करोड़ पर आ गया। वहीं, कंसोलिडेटेड स्तर पर कंपनी को ₹0.84 करोड़ का नेट लॉस उठाना पड़ा है। मैनेजमेंट का कहना है कि यह समय 'कंसोलिडेशन' का है और कंपनी भविष्य की ग्रोथ के लिए बड़ा कैपिटल एक्सपेंडिचर कर रही है।
क्यों है कंपनी पर भरोसा?
कंपनी के पास ₹100 करोड़ से ज्यादा के ऑर्डर्स हैं। चाकन (पुणे) फैसिलिटी में क्षमता को 4 गुना बढ़ाया गया है, जहां अब 3 शिफ्ट में काम चल रहा है। इसके अलावा, अमेरिका के ह्यूस्टन स्थित QFC LLC में 45% हिस्सेदारी लेकर कंपनी ग्लोबल मार्केट में उतरने की तैयारी में है। रणनीतिक बदलाव के तहत, कंपनी ने H2O Dynamics India को ₹7.35 करोड़ में बेचकर अपने कोर बिजनेस पर ध्यान केंद्रित किया है।
डिफेंस और गवर्नेंस में हलचल
डिफेंस सेक्टर में भी कंपनी ने अच्छी प्रगति की है, विशेष रूप से नौसेना और सबमरीन एप्लिकेशन के लिए DMDE से मंजूरी मिली है। गवर्नेंस के मोर्चे पर, APRA & Associates LLP को नया स्टैच्यूटरी ऑडिटर नियुक्त किया गया है, और मैनेजिंग डायरेक्टर ब्रजेश माधव मनेरिकर व होल-टाइम डायरेक्टर स्वरूप रघुवीर नाटेकर की दोबारा नियुक्ति पर शेयरहोल्डर्स वोट करेंगे।
निवेशकों के लिए जोखिम
निवेशकों को कंपनी के वर्किंग कैपिटल साइकिल पर नजर रखनी होगी। मैनेजमेंट ने माना है कि रिसीवेबल्स और इन्वेंट्री को कैश में बदलना अब उनकी प्राथमिकता है। आने वाली तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि कंपनी अपने बड़े ऑर्डर पाइपलाइन को बिना मार्जिन खराब किए कितनी कुशलता से पूरा करती है।
