Prostarm Info Systems के शेयर में तूफानी तेजी! Q1 FY27 में **156%** बढ़ा मुनाफा, पहुंचा **₹5 करोड़**

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AuthorMehul Desai|Published at:
Prostarm Info Systems के शेयर में तूफानी तेजी! Q1 FY27 में **156%** बढ़ा मुनाफा, पहुंचा **₹5 करोड़**

Prostarm Info Systems ने Q1 FY27 के नतीजे पेश कर दिए हैं। कंपनी के प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले **156%** का जबरदस्त उछाल आया है और यह **₹5 करोड़** रहा। कंपनी के रेवेन्यू में भी **38%** की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

Prostarm Info Systems के शानदार नतीजे

Prostarm Info Systems Ltd. ने 30 जून 2026 को समाप्त पहली तिमाही (Q1 FY27) के वित्तीय नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी ने ₹5 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 156% ज्यादा है। वहीं, कंपनी के रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस में 38% की बढ़ोतरी देखी गई और यह ₹76 करोड़ रहा।

EBITDA मार्जिन में सुधार

कंपनी का EBITDA मार्जिन 126 बेसिस पॉइंट बढ़कर 8.55% हो गया, हालांकि एब्सोल्यूट EBITDA ₹7 करोड़ रहा। मैनेजमेंट के मुताबिक, पिछली तिमाही (Q4 FY26) के ₹104 करोड़ के मुकाबले रेवेन्यू में आई कमी की मुख्य वजह पहली तिमाही में होने वाली सामान्य सीजनल स्लोडाउन है।

C&I BESS सेगमेंट पर फोकस

इस मजबूत प्रदर्शन के पीछे कंपनी की स्ट्रेटेजिक शिफ्ट भी एक बड़ा कारण है। Prostarm Info Systems अब बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के कमर्शियल और इंडस्ट्रियल (C&I) सेगमेंट पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रही है। Utility-scale BESS मार्केट में मार्जिन प्रेशर को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। माना जा रहा है कि इस कदम से कंपनी को भारतीय मार्केट के कम संगठित C&I सेक्टर में बेहतर मार्जिन और मार्केट शेयर हासिल करने में मदद मिलेगी।

आगे क्या?

कंपनी अपने 1.2 GWh की झज्जर फैसिलिटी को H1 FY27 में और गुजरात UPS फैसिलिटी को Q2 FY27 में ऑपरेशनल करने की तैयारी में है। ये नई क्षमताएं भविष्य में रेवेन्यू ग्रोथ को गति देंगी। Prostarm Info Systems ने FY27 के लिए कम से कम 25% रेवेन्यू ग्रोथ का गाइडेंस बनाए रखा है और पूरे साल के लिए EBITDA मार्जिन 12-13% रहने की उम्मीद है।

जोखिम पर एक नज़र

कंपनी के सामने कुछ जोखिम भी हैं। लिथियम सेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, एक्सपोर्ट इंसेंटिव में बदलाव और चीन से लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ सकते हैं। इसके अलावा, South Eastern Railway जैसे बड़े ऑर्डर्स के लिए प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन टाइमलाइन और साइट क्लियरेंस भी महत्वपूर्ण रहेंगे। नई फैक्ट्रियों के शुरू होने से शुरुआती दौर में ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.