Prime Focus ने FY2026 में ₹301 करोड़ का कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट कमाया
Prime Focus Limited ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए ₹301.42 करोड़ का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट हासिल किया है। यह पिछले साल के ₹458.28 करोड़ के कंसॉलिडेटेड घाटे से एक महत्वपूर्ण सुधार है। कंपनी के कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू में भी 29.66% की जोरदार बढ़ोतरी हुई और यह ₹4,587.32 करोड़ पर पहुंच गया।
स्टैंडअलोन बिजनेस में घाटा, बोर्ड ने डिविडेंड न देने का फैसला
हालांकि, अच्छी खबर के साथ एक चिंताजनक बात भी सामने आई है। कंपनी ने स्टैंडअलोन बेसिस पर FY2026 के लिए ₹2.74 करोड़ का नेट लॉस रिपोर्ट किया है। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी ने ₹185.90 करोड़ का मुनाफा कमाया था। स्टैंडअलोन रेवेन्यू में 29.93% की गिरावट आई और यह ₹27.86 करोड़ रहा।
इसके अलावा, कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने वित्तीय वर्ष 2026 के लिए किसी भी डिविडेंड (dividend) की सिफारिश न करने का फैसला किया है।
क्यों अहम हैं ये नतीजे?
कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट में यह उछाल ग्रुप के बेहतर ऑपरेशनल परफॉरमेंस (operational performance) को दर्शाता है। लेकिन, स्टैंडअलोन बिजनेस में जारी घाटा और अदालती मामले निवेशकों के लिए बड़ी चिंता का विषय बने हुए हैं। कंपनी Raspalfa Services Private Limited (RASPL) के साथ ₹353.80 करोड़ के क्लेम (claim) को लेकर इंसॉल्वेंसी (insolvency) की कार्यवाही में उलझी हुई है।
पिछली कहानी
FY2025 में Prime Focus ने ₹458.28 करोड़ का कंसॉलिडेटेड घाटा दर्ज किया था। इस साल ₹301.42 करोड़ के प्रॉफिट में आना यह बताता है कि कंपनी ने कंसॉलिडेटेड ऑपरेशंस में लागत कम करने या रेवेन्यू बढ़ाने की रणनीतियां अपनाई हैं।
दूसरी ओर, स्टैंडअलोन बिजनेस में स्थिति उलट गई है। FY2025 के ₹185.90 करोड़ के प्रॉफिट से यह FY2026 में ₹2.74 करोड़ के घाटे में चला गया है।
आगे क्या?
निवेशक अब कंसॉलिडेटेड लेवल पर प्रॉफिट की निरंतरता देखना चाहेंगे। ग्रुप के ओवरऑल पॉजिटिव ट्रेंड के साथ तालमेल बिठाने के लिए स्टैंडअलोन परफॉरमेंस में सुधार की जरूरत है। लंबे समय तक फाइनेंशियल स्टेबिलिटी (financial stability) और निवेशकों के भरोसे के लिए इंसॉल्वेंसी की कार्यवाही का समाधान महत्वपूर्ण होगा।
जोखिम
मुख्य जोखिमों में RASPL द्वारा शुरू की गई इंसॉल्वेंसी कार्यवाही शामिल है, जिसमें ₹353.80 करोड़ का क्लेम है। हालांकि NCLAT ने NCLT के ऑर्डर पर स्टे (stay) लगा दिया है और कंपनी ने क्लेम राशि जमा कर दी है, मामला अभी कोर्ट में है। स्टैंडअलोन बिजनेस में लगातार घाटा भी एक जोखिम है।
आगे क्या ट्रैक करें?
निवेशकों को इंसॉल्वेंसी केस से संबंधित NCLAT की कार्यवाही पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए और आने वाली तिमाहियों में कंपनी की स्टैंडअलोन फाइनेंशियल परफॉरमेंस को बेहतर बनाने की क्षमता पर ध्यान देना चाहिए।
