Precision Wires India लिमिटेड ने वित्तीय वर्ष 2026 के नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने रेवेन्यू में **34.75%** की बढ़त के साथ **₹5,410 करोड़** का आंकड़ा पार किया, वहीं नेट प्रॉफिट (PAT) में **72.45%** की जोरदार उछाल के साथ **₹155 करोड़** दर्ज किया गया। कंपनी की विस्तार योजनाएं (Capacity Expansion Projects) भी तय समय पर आगे बढ़ रही हैं।
Precision Wires India का शानदार वित्तीय वर्ष 2026: रेवेन्यू में 34.75% की बढ़त, प्रॉफिट में 72.45% का उछाल
Precision Wires India लिमिटेड ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अपने नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस दौरान ₹5,410.18 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले वित्तीय वर्ष के ₹4,014.83 करोड़ की तुलना में 34.75% अधिक है। मुनाफे (PAT) में तो और भी बड़ी छलांग देखने को मिली, जो 72.45% बढ़कर ₹155.27 करोड़ पर पहुँच गया। पिछले वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा ₹90.04 करोड़ था।
Earnings Per Share (EPS) में भी 70.24% का उल्लेखनीय इजाफा हुआ, जो ₹5.04 से बढ़कर ₹8.58 हो गया।
क्यों है यह अहम?
ये नतीजे दर्शाते हैं कि Precision Wires India के उत्पादों की मांग मजबूत बनी हुई है। साथ ही, कंपनी अपनी परिचालन दक्षता (Operational Efficiency) और लागत प्रबंधन (Cost Management) में सफल रही है, जिससे बिक्री वृद्धि को मुनाफे में बदलने में मदद मिली है। चुनौतीपूर्ण आर्थिक माहौल के बावजूद, मुनाफे में यह बड़ी वृद्धि कंपनी की बेहतर कार्यप्रणाली का प्रमाण है। ₹1.25 प्रति शेयर का सुझाया गया डिविडेंड (Dividend) भी कंपनी के भविष्य के प्रति विश्वास को दिखाता है।
विस्तार योजनाओं का क्या है हाल?
Precision Wires India अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने (Capacity Expansion) और वर्टिकल इंटीग्रेशन (Vertical Integration) पर लगातार काम कर रही है। गुजरात के वालवडा में कॉपर रॉड प्रोजेक्ट (Copper Rod Project) पूरा हो चुका है और मार्च 2026 से इसका व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो गया है। वहीं, गुजरात के जरौली में कॉपर रिफाइनिंग/रीसाइक्लिंग प्रोजेक्ट (Copper Refining/Recycling Project) पर भी काम जारी है। इन योजनाओं के पूरा होने पर, 2027-28 की दूसरी तिमाही तक कंपनी की कुल स्थापित क्षमता 68,500 MT/PA तक पहुँचने का अनुमान है।
आगे क्या बदलेगा?
बढ़ाई गई क्षमता के साथ, कंपनी आगे भी अच्छी ग्रोथ की उम्मीद कर रही है। रिफाइनिंग और रीसाइक्लिंग पर ध्यान देने से कच्चे माल की लागत को नियंत्रित करने में कंपनी को एक बढ़त मिलने की संभावना है। जुलाई 2025 में हुए प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट (Preferential Allotment) से जुटाई गई पूंजी भी इन विस्तार योजनाओं को फंड करने में मदद करेगी।
जोखिम पर नजर
कंपनी के मैनेजमेंट ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुछ संभावित जोखिमों की ओर इशारा किया है। ईरान-इजरायल युद्ध, यूक्रेन संघर्ष और अमेरिका-चीन जैसे भू-राजनीतिक तनावों (Geopolitical Tensions) का मांग और कच्चे माल की कीमतों पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और रुपये के कमजोर होने का खतरा भी बना हुआ है।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशक अब जरौली रीसाइक्लिंग प्रोजेक्ट से ट्रायल प्रोडक्शन शुरू होने और उसके लागत दक्षता पर पड़ने वाले प्रभाव पर बारीकी से नजर रखेंगे। कंपनी की यह क्षमता देखना महत्वपूर्ण होगा कि वह भू-राजनीतिक जोखिमों का सामना करते हुए और इनपुट लागतों का प्रबंधन करते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 में अपनी ग्रोथ की रफ्तार बनाए रख पाती है या नहीं।
