Pradeep Metals ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने **10.27%** की रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है और **25%** डिविडेंड की सिफारिश की है। साथ ही, नागपुर में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए **₹250 करोड़** के नए Capex को मंजूरी भी दी गई है।
Pradeep Metals FY26 रिजल्ट्स: डिफेंस यूनिट के लिए ₹250 करोड़ का Capex मंजूर
Pradeep Metals ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹330.31 करोड़ का स्टैंडअलोन टोटल इनकम दर्ज किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 10.27% ज्यादा है। कंपनी के प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में भी 9.42% का इजाफा हुआ है और यह ₹25.33 करोड़ रहा। कंसोलिडेटेड PAT 11.64% बढ़कर ₹30.34 करोड़ हो गया।
क्या है खास?
कंपनी के मैनेजमेंट ने ₹250 करोड़ के एक नए ग्रीनफील्ड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट को मंजूरी दी है, जो नागपुर के बुटीबोरी में बनेगा। इस प्लांट का मुख्य फोकस आर्टिलरी शेल (तोप के गोले) का निर्माण करना होगा। इसके अलावा, कंपनी ने 25% (यानी ₹2.50 प्रति शेयर) का फाइनल डिविडेंड देने की भी सिफारिश की है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह?
यह नतीजे कंपनी के स्थिर वित्तीय प्रदर्शन को दर्शाते हैं। वहीं, ₹250 करोड़ का Capex डिफेंस सेक्टर में कंपनी की बड़ी स्ट्रैटेजिक चाल का संकेत देता है। इससे Pradeep Metals को बढ़ते ग्लोबल डिफेंस खर्च का फायदा उठाने में मदद मिलेगी। कंपनी अपनी 100% ऑपरेशन्स को रिन्यूएबल एनर्जी से चलाने की भी योजना बना रही है, जो लंबी अवधि की सस्टेनेबिलिटी के लिए एक पॉजिटिव कदम है।
पिछला प्रदर्शन
पिछले वित्तीय वर्ष (FY 2024-25) में, Pradeep Metals ने ₹299.53 करोड़ का स्टैंडअलोन टोटल इनकम और ₹23.15 करोड़ का स्टैंडअलोन PAT दर्ज किया था। कंपनी लगातार अपने ऑपरेशन्स का विस्तार कर रही है और अपने प्रोडक्ट्स की रेंज व कस्टमर बेस को डाइवर्सिफाई करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कंपनी के एक्सपोर्ट्स का भी एक बड़ा हिस्सा है।
आगे क्या?
इस नई डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से कंपनी के लिए ग्रोथ के नए रास्ते खुलेंगे, खासकर बढ़ते ग्लोबल मार्केट को देखते हुए। साथ ही, रिन्यूएबल एनर्जी पर शिफ्ट होना कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण सस्टेनेबिलिटी कदम है।
जोखिम
कंपनी को बढ़ते इम्पोर्ट्स और ग्लोबल कंपटीशन से बाजार के जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। कंपनी के 60% प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट होते हैं, इसलिए यह भू-राजनीतिक स्थितियों और ट्रेड डायनामिक्स के प्रति संवेदनशील है। महंगाई का दबाव भी मार्जिन पर असर डाल सकता है, अगर इसे सीधे क्लाइंट्स पर पास ऑन नहीं किया गया तो।
