Patel Engineering के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। कंपनी का फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में नेट प्रॉफिट **21.6%** बढ़कर **₹294.5 करोड़** हो गया है। साथ ही, कंपनी पर कर्ज़ दस साल के निचले स्तर पर आ गया है, जिससे डेट-टू-इक्विटी रेशियो में सुधार हुआ है। कंपनी के पास **₹15,119 करोड़** का तगड़ा ऑर्डर बुक भी है।
पटेल इंजीनियरिंग के नतीजे: मुनाफे में उछाल, कर्ज़ में भारी कमी
Patel Engineering ने अपने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी के नेट प्रॉफिट में पिछले साल के मुकाबले 21.6% का शानदार इजाफा हुआ है, जो ₹294.5 करोड़ रहा। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू ₹5,102.7 करोड़ पर स्थिर रहा।
कर्ज़ में आई बड़ी गिरावट, मजबूत ऑर्डर बुक
कंपनी के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इसका कंसोलिडेटेड ग्रॉस डेट (consolidated gross debt) एक दशक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। यह ₹1,602.5 करोड़ से घटकर ₹1,187 करोड़ हो गया है। इस कर्ज़ में कमी से कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो सुधरकर 0.27x हो गया है, जो वित्तीय सेहत के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत है। इसके अलावा, ₹15,119.3 करोड़ का मजबूत ऑर्डर बुक, 2.96x के बुक-टू-बिल रेशियो के साथ, भविष्य के रेवेन्यू के लिए अच्छी उम्मीदें जगाता है।
"बिल्डर से वैल्यू क्रिएटर" की रणनीति
Patel Engineering फिलहाल "बिल्डर से वैल्यू क्रिएटर" की रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत कंपनी एसेट ओनरशिप (asset ownership) की ओर बढ़ रही है, खासकर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में BOOT मॉडल के तहत। इस बदलाव से कंपनी का लक्ष्य लंबी अवधि में वैल्यू बढ़ाना है। कंपनी देश भर में कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रही है, जिनमें सुबनसिरी लोअर एचईपी (Subansiri Lower HEP) और CIDCO ट्रीटेड वाटर टनल (CIDCO treated water tunnel) शामिल हैं।
आगे क्या उम्मीद करें?
कंपनी की बेहतर वित्तीय स्थिति और कर्ज़ में कमी से उसकी रणनीतिक योजनाओं को बल मिलेगा। मैनेजमेंट का मानना है कि सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्चों को देखते हुए FY27 के लिए भी आउटलुक सकारात्मक है।
चिंता की बात
हालांकि, प्रॉफिट में बढ़ोतरी के बावजूद, कंपनी के ऑपरेटिंग EBITDA (Operating EBITDA) में थोड़ी गिरावट देखी गई है। यह FY25 के ₹733.2 करोड़ से घटकर FY26 में ₹684.0 करोड़ रह गया है। ऐसे में, मार्जिन में सुधार पर लगातार ध्यान देना कंपनी के लिए महत्वपूर्ण होगा।
