Pasari Spinning Mills: मुनाफे में 22% की गिरावट, ' गोइंग कंसर्न' पर ऑडिटर की चेतावनी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Pasari Spinning Mills: मुनाफे में 22% की गिरावट, ' गोइंग कंसर्न' पर ऑडिटर की चेतावनी
Overview

Pasari Spinning Mills ने FY26 के लिए अपने नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल **22.45%** की गिरावट दर्ज की है। ऑडिटर ने कंपनी की 'गोइंग कंसर्न' (यानी, चलते रहने की क्षमता) पर मटेरियल अनिश्चितता जताई है, जिसका मुख्य कारण कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) के साथ एक बड़ा कानूनी विवाद है।

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Pasari Spinning Mills का FY26 प्रदर्शन: मुनाफे में 22.45% की गिरावट, ऑडिटर ने जताई 'गोइंग कंसर्न' की अनिश्चितता

Pasari Spinning Mills Limited ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए ₹0.28 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल के ₹0.36 करोड़ की तुलना में 22.44% की गिरावट है। बेसिक Earnings Per Share (EPS) भी ₹0.26 से घटकर ₹0.20 रह गया।

निवेशक ध्यान दें: किराये की आय में कमी और CCI विवाद से कानूनी जोखिमों के कारण मुनाफे पर असर पड़ा है।

क्या हुआ?

कंपनी ने अपने ऑडिट किए गए वित्तीय परिणाम घोषित किए। FY25 के ₹0.69 करोड़ (₹68.66 लाख) की तुलना में FY26 में कंपनी की कुल आय 22.45% घटकर ₹0.53 करोड़ (₹53.25 लाख) रह गई। आय में इस गिरावट का सीधा असर नेट प्रॉफिट पर पड़ा, जो 22.44% घटकर ₹0.28 करोड़ (₹27.96 लाख) हो गया।

कंपनी के मुताबिक, मुनाफे में कमी का मुख्य कारण किराये की आय में भारी गिरावट है। कोर्ट के आदेश के बाद जनवरी 2026 में कंपनी के परिसर खाली कराए जाने के कारण यह आय का नुकसान हुआ।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

सबसे चिंताजनक बात ऑडिटर की रिपोर्ट है, जिसमें कंपनी की 'गोइंग कंसर्न' (यानी, भविष्य में सामान्य रूप से कारोबार जारी रखने की क्षमता) को लेकर 'मटेरियल अनिश्चितता' (महत्वपूर्ण अनिश्चितता) जताई गई है। यह अनिश्चितता कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) के साथ चल रहे एक बड़े कानूनी विवाद के कारण उत्पन्न हुई है।

इसके अतिरिक्त, ऑडिटर ने एक गवर्नेंस मुद्दे को भी उजागर किया है: कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) ने वित्तीय विवरणों पर हस्ताक्षर नहीं किए, जो कि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 134 का उल्लंघन है। कंपनी पर FY 2019-20 से प्रॉपर्टी टैक्स का बकाया भी है।

पृष्ठभूमि

कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के साथ कानूनी लड़ाई में कथित तौर पर ₹7.03 करोड़ की बकाया राशि का मामला शामिल है। इस संबंध में निष्पादन कार्यवाही शुरू की गई थी और कंपनी की संपत्ति की बिक्री की घोषणा भी की गई थी। हालांकि जनवरी 2026 में हाई कोर्ट ने निष्पादन पर रोक लगा दी, लेकिन मामला अभी भी लंबित है। इस विवाद के कारण ₹6.39 करोड़ की आकस्मिक देनदारी (contingent liability) का खुलासा किया गया है।

इसके अलावा, Pasari Spinning Mills ने संबंधित पक्ष Pasari Exports Limited के बकाया ₹0.50 करोड़ का निपटान FY26 में कर दिया है, जबकि ₹1.21 करोड़ अभी भी 31 मार्च, 2026 तक देय थे।

अब क्या बदलेगा?

निवेशकों को अब बढ़े हुए जोखिम का सामना करना पड़ रहा है। 'गोइंग कंसर्न' चेतावनी का मतलब है कि कंपनी के भविष्य के संचालन और अपने दायित्वों को पूरा करने की क्षमता संदिग्ध है। वित्तीय विवरणों पर CFO के हस्ताक्षर का न होना संभावित नियंत्रण कमजोरियों का संकेत देता है।

कंपनी को CCI कानूनी विवाद का समाधान करना होगा और प्रॉपर्टी टैक्स सहित अपने वित्तीय और वैधानिक दायित्वों को पूरा करने की दिशा में काम करना होगा।

किन जोखिमों पर नजर रखें?

सबसे बड़ा जोखिम CCI मुकदमे का परिणाम है, जिससे कंपनी की संपत्ति बिक सकती है। ऑडिटर का 'गोइंग कंसर्न' नोट मूलभूत वित्तीय अस्थिरता को दर्शाता है। गवर्नेंस की खामियां, जैसे कि अनहस्ताक्षरित वित्तीय विवरण और लंबित कर बकाया, चिंताएं बढ़ाती हैं।

आगे क्या ट्रैक करें?

निवेशकों को CCI कानूनी मामले में होने वाले घटनाक्रमों, कंपनी की ओर से गवर्नेंस मुद्दों के समाधान के बारे में किसी भी संचार और आय उत्पन्न करने तथा देनदारियों का प्रबंधन करने की उसकी क्षमता पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.