Panasonic Energy India के लिए सितंबर तिमाही बेहद चुनौतीपूर्ण रही है। कंपनी को **₹15.49 करोड़** का नेट लॉस हुआ है, जिसके पीछे मुख्य कारण पीथमपुर प्लांट में लगी आग और बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का पालन न करना है। साथ ही कंपनी में बड़े नेतृत्व परिवर्तन भी हुए हैं।
मुनाफे से नुकसान तक का सफर
Panasonic Energy India Company Ltd के वित्तीय नतीजों ने निवेशकों को निराश किया है। सितंबर तिमाही में कंपनी को ₹15.49 करोड़ का नेट लॉस हुआ है, जबकि पिछली तिमाही में कंपनी ₹1.66 करोड़ के मुनाफे में थी। कंपनी का रेवेन्यू भी ₹63.52 करोड़ से घटकर ₹54.74 करोड़ रह गया है।
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह जुलाई 2026 में पीथमपुर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में लगी आग है। इस हादसे के चलते कंपनी को ₹7.26 करोड़ का एक्सेप्शनल एक्सपेंस उठाना पड़ा है, जो कि एसेट और इन्वेंट्री के नुकसान के कारण हुआ।
ऑडिटर्स और रेगुलेटरी चिंताएं
कंपनी के ऑडिटर्स BSR & Co ने एक बार फिर कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने 'Battery Waste Management Rules (BWMR), 2022' के तहत संभावित लायबिलिटीज के लिए प्रोविजन न बनाने पर आपत्ति जताई है। कंपनी का तर्क है कि सरकारी स्पष्टीकरण का इंतजार है, लेकिन ऑडिटर्स की यह टिप्पणी एक बड़ी गवर्नेंस रिस्क बनी हुई है।
मैनेजमेंट में हलचल
ऑपरेशनल मुश्किलों के बीच कंपनी से एक और बड़ी खबर आई है—कंपनी सेक्रेटरी, कंप्लायंस ऑफिसर और नोडल ऑफिसर, सुश्री सृष्टि जैन ने 5 नवंबर, 2026 से इस्तीफा दे दिया है। इसके अलावा, शेयरधारकों द्वारा मंजूर ₹1.95 प्रति शेयर डिविडेंड का वितरण भी अभी प्रक्रिया में है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
आगे की राह अभी धुंधली है। निवेशकों को मुख्य रूप से दो चीजों पर ध्यान देना होगा:
- आग से हुए नुकसान का इंश्योरेंस सेटलमेंट कब तक पूरा होता है।
- बैटरी वेस्ट नियमों पर सरकार का क्या रुख रहता है, जो कंपनी की फ्यूचर लायबिलिटी को प्रभावित कर सकता है।
