POCL Enterprises ने Trichy Metals and Alloys Private Limited (TMA) में **51%** हिस्सेदारी **₹12.47 करोड़** में खरीद ली है। इस डील से POCL की लीड रीसाइक्लिंग (Lead Recycling) के क्षेत्र में मौजूदगी और मजबूत होगी। TMA ने पिछले फाइनेंशियल ईयर में तगड़ी ग्रोथ दिखाई है और इसमें आगे बढ़ने की ज़बरदस्त क्षमता है।
POCL Enterprises ने Trichy Metals में खरीदी 51% हिस्सेदारी
POCL Enterprises Limited ने Trichy Metals and Alloys Private Limited (TMA) में 51% इक्विटी हिस्सेदारी ₹12.47 करोड़ में हासिल कर ली है। यह ट्रांज़ैक्शन 15 जुलाई, 2026 को कैश पेमेंट के ज़रिए पूरा हुआ।
TMA का दमदार प्रदर्शन
Trichy Metals and Alloys ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में ₹163.74 करोड़ का टर्नओवर दर्ज किया था, जबकि इसी दौरान उनका नेट प्रॉफिट (Profit After Tax) ₹3.60 करोड़ रहा। कंपनी के पास 26,000 MTPA की रिफाइनिंग कैपेसिटी और 21,500 MTPA की स्मेल्टिंग कैपेसिटी है, जिससे सालाना ₹600 करोड़ तक का रेवेन्यू जेनरेट करने की क्षमता है।
यह डील क्यों अहम है?
इस अधिग्रहण से POCL की लीड रीसाइक्लिंग बिज़नेस में ऑपरेशनल स्केल काफी बढ़ने वाला है। TMA एक प्रॉफिटेबल कंपनी है जिसका रेवेन्यू लगातार बढ़ रहा है और इसमें काफी ज़्यादा क्षमता है। यह डील नॉन-फेरस मेटल्स जैसे कॉपर और एल्युमीनियम में डाइवर्सिफिकेशन के रास्ते भी खोल सकती है।
पीछे की कहानी
TMA ने लगातार रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में इसका टर्नओवर ₹163.74 करोड़ रहा, जो 2024-25 के ₹112.85 करोड़ और 2023-24 के ₹103.97 करोड़ से काफी ज़्यादा है।
आगे क्या होगा?
POCL Enterprises अब TMA में कंट्रोलिंग इंटरेस्ट रखेगी। कंपनी ऑपरेशन्स को इंटीग्रेट करके रिसोर्स एफिशिएंसी और लीड रीसाइक्लिंग में मार्केट शेयर बढ़ाने की कोशिश करेगी। इस एक्विजिशन से सिनर्जीज़ और डाइवर्सिफिकेशन के ज़रिए वैल्यू अनलॉक होने की उम्मीद है।
किन जोखिमों पर नज़र रखें?
एक बड़ा फैक्टर TMA को एनवायरनमेंट, फॉरेस्ट और क्लाइमेट चेंज मिनिस्ट्री (MoEF) से मिलने वाली अप्रूवल है। लीड स्क्रैप इम्पोर्ट करने के लिए यह क्लीयरेंस ज़रूरी है, जो कंपनी के लगातार चलने के लिए महत्वपूर्ण है।
भविष्य में क्या ट्रैक करें?
इन्वेस्टर्स को लीड स्क्रैप इम्पोर्ट के लिए TMA की MoEF रेगुलेटरी अप्रूवल की प्रगति और POCL द्वारा TMA के ऑपरेशन्स के इंटीग्रेशन की एफिशिएंसी पर नज़र रखनी चाहिए। ₹600 करोड़ के सालाना रेवेन्यू पोटेंशियल को हासिल करना भी एक ज़रूरी इंडिकेटर होगा।
