PNC Infratech ने अपने नतीजों के साथ बड़ी कानूनी राहत की खबर दी है। कंपनी ने Q2 में **₹114.67 करोड़** का प्रॉफिट और **₹1,322.47 करोड़** का रेवेन्यू दर्ज किया है। वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट से NHAI की 3 साल की पाबंदी पर स्टे मिल गया है।
मुनाफे के पीछे का सच
कंपनी के प्रदर्शन में ₹217.65 करोड़ की सेटलमेंट इनकम का बड़ा हाथ है, जो 'विवाद से विश्वास III' स्कीम के तहत आगरा बाईपास प्रोजेक्ट से मिली है। यह एक वन-टाइम गेन है, जिसने छमाही परिणामों को सहारा दिया है।
कोर्ट से बड़ी राहत
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी खबर कानूनी मोर्चे से आई है। NHAI ने 'कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे' में कथित कमियों के चलते कंपनी और उसकी SPV 'अवध एक्सप्रेसवे' को 3 साल के लिए बैन कर दिया था। लेकिन अब दिल्ली हाईकोर्ट ने इस पर अंतरिम स्टे (Stay) लगा दिया है, जिससे कंपनी फिर से सरकारी टेंडर्स में हिस्सा ले सकेगी।
कजाकिस्तान में कदम
कंपनी अब ग्लोबल बाजार में भी हाथ आजमा रही है। PNC Infratech ने कजाकिस्तान में अपनी नई सब्सिडियरी 'PNC Infratech (Kazakhstan) LLP' बनाई है, जो वहां रोड और हाईवे सेक्टर में इंफ्रा सर्विसेज देगी।
जोखिम और आगे की राह
हालाँकि कोर्ट से राहत मिली है, लेकिन स्ट्रक्चरल डिफेक्ट्स का मुद्दा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऑडिटर्स ने भी इस पर 'Emphasis of Matter' नोट डाला है। निवेशकों को कोर्ट की अगली सुनवाई और NHAI के रुख पर कड़ी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि कंपनी की भविष्य की टेंडरिंग क्षमता इसी पर टिकी है।
