PBA Infrastructure ने FY 2025-26 के लिए **₹82.02 करोड़** के नेट लॉस की घोषणा की है। कंपनी की वित्तीय स्थिति बेहद खराब है और 2013 से ही इसे NPA घोषित किया जा चुका है, जिसके चलते ऑडिटर ने इसके भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
भारी वित्तीय दबाव में कंपनी
कंपनी के लिए पिछला साल बेहद निराशाजनक रहा है। पिछले साल जहां कंपनी ने ₹2.22 करोड़ का मुनाफा कमाया था, वहीं इस साल यह आंकड़ा ₹82.02 करोड़ के बड़े घाटे में बदल गया है। रेवेन्यू भी ₹36.45 करोड़ से घटकर ₹23.35 करोड़ रह गया है। कंपनी ने अपनी 52वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) 26 सितंबर, 2026 को बुलाई है।
ऑडिटर की चेतावनी: 'गोइंग कंसर्न' पर खतरा
ऑडिटर्स ने कंपनी की 'गोइंग कंसर्न' (लगातार कामकाज जारी रखने) की क्षमता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कंपनी पर भारी लायबिलिटीज हैं और एसेट्स के मुकाबले कर्ज का बोझ बहुत ज्यादा है। इसके अलावा, ₹24.63 करोड़ का इन्वेंट्री वर्क-इन-प्रोग्रेस कानूनी विवादों में फंसा हुआ है, जिससे एसेट वैल्यू का सही आकलन करना मुश्किल हो रहा है।
मैनेजमेंट की कोशिशें
कंपनी अब बैंकों के साथ वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) के जरिए इस संकट से निकलने की कोशिश कर रही है। साथ ही, बकाया राशि की वसूली के लिए आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) का रास्ता अपनाया जा रहा है। रिकवरी की कार्यवाही को रोकने के लिए कंपनी ने Debt Recovery Tribunal (DRT) से अंतरिम राहत की मांग भी की है।
निवेशकों के लिए सलाह
निवेशकों को अब कंपनी की ओर से OTS बातचीत और कोर्ट की कार्यवाही पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। ऑडिटर की रिपोर्ट में 'गोइंग कंसर्न' को लेकर जो चिंताएं जताई गई हैं, वे कंपनी के भविष्य के लिए सबसे बड़ा रेड फ्लैग हैं।
