Nova Iron & Steel के लिए मुश्किलों का दौर जारी है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में **₹15.97 करोड़** का बड़ा नुकसान दर्ज किया है, जबकि उस पर दिवालियापन और Enforcement Directorate (ED) की कार्रवाई का साया मंडरा रहा है।
बिगड़ती फाइनेंशियल स्थिति
कंपनी के नतीजों पर नजर डालें, तो मार्च 2026 तक कंपनी का नेट लॉस ₹15.97 करोड़ रहा है, जबकि रेवेन्यू ₹466.66 करोड़ पर रही। कंपनी की नेट वर्थ फिलहाल नेगेटिव ₹27.06 करोड़ है और देनदारियां एसेट्स से ₹109.13 करोड़ अधिक हो चुकी हैं।
ऑडिटर्स के सवाल
कंपनी के स्टैच्यूटरी ऑडिटर्स ने रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इसमें ₹60.38 करोड़ के बिना किसी लोन एग्रीमेंट वाले उधार और अनकन्फर्म्ड ट्रेड बैलेंसेस शामिल हैं। साथ ही, कंपनी की अपनी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी अब नहीं रही, वे किराए की जगह पर काम कर रहे हैं।
कानूनी और रेगुलेटरी घेराबंदी
कंपनी पर चौतरफा दबाव है:
- ED का शिकंजा: एजेंसी ने 9.26 एकड़ जमीन और 43.62% इक्विटी को अटैच करने के ऑर्डर जारी किए हैं।
- NCLT का केस: M/s M N Corporation ने कंपनी के खिलाफ इंसॉल्वेंसी की याचिका दायर की है, जो अभी पेंडिंग है।
आगे का रास्ता
मैन्युफैक्चरिंग कैपेबिलिटी गंवाने के बाद अब मैनेजमेंट अपना बिजनेस मॉडल पूरी तरह बदलने की फिराक में है। कंपनी अब स्टील और मेटल की ट्रेडिंग में उतरने के लिए शेयरधारकों से मंजूरी मांग रही है, ताकि कैश फ्लो जेनरेट किया जा सके। निवेशकों को अब NCLT की सुनवाई और ED की कार्रवाई के असर पर पैनी नजर रखनी चाहिए।
