Nilachal Refractories ने अपने FY26 के नतीजों में घाटे को **₹4.85 करोड़** तक सीमित कर लिया है, जो पिछले साल **₹22.02 करोड़** था। कंपनी अब वॉलंटरी Delisting और SFAL Speciality Alloys Limited के साथ ओनरशिप बदलने की प्रक्रिया से गुजर रही है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर एक नजर
कंपनी की 49वीं एनुअल रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल टोटल इनकम ₹2.38 करोड़ रही, जो पिछले साल ₹1.06 करोड़ थी। घाटे में कमी जरूर आई है, लेकिन कंपनी की नींव अभी भी काफी कमजोर है।
ओनरशिप में बड़ा बदलाव
कंपनी अब एक बड़े ट्रांजिशन फेज में है। SFAL Speciality Alloys Limited के साथ ओनरशिप ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके साथ ही, कंपनी ने अपने शेयर बाजार से हटाने यानी वॉलंटरी Delisting का ऐलान भी किया है। निवेशकों के लिए अब पूरा फोकस 'ओपन ऑफर' और Delisting प्राइस पर है। मैनेजमेंट ने हाल ही में Bijay Kumar और Priyanka Poddar को इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स के तौर पर नियुक्त किया है, ताकि इस बदलाव की प्रक्रिया को सुचारू बनाया जा सके।
ऑडिटर्स की चेतावनी और जोखिम
Statutory ऑडिटर्स Jain Saraogi & Co. LLP ने कंपनी की रिपोर्ट पर 'Qualified Opinion' दिया है। ऑडिटर्स ने सबसे बड़ी चिंता 'Going Concern' (कंपनी के भविष्य में बने रहने की क्षमता) को लेकर जताई है। कंपनी का नेट वर्थ -₹32.79 करोड़ है, जो काफी चिंताजनक है। साथ ही, साल 2000 से पेंडिंग 11% क्युमुलेटिव प्रेफरेंस शेयर्स को रिडीम न कर पाना भी एक बड़ी गवर्नेंस चूक है।
निवेशकों के लिए सलाह
निवेशकों को कंपनी की लिक्विडिटी और भविष्य की योजनाओं पर पैनी नजर रखने की जरूरत है। कंपनी का अस्तित्व अब रीस्ट्रक्चरिंग और एसेट मोनेटाइजेशन की सफलता पर टिका है। फिलहाल सभी की निगाहें Delisting की फाइनल टाइमलाइन और प्राइस पर टिकी हैं।
