National Oxygen Ltd ने पिछले साल के घाटे को पार करते हुए इस फाइनेंशियल ईयर में अच्छा मुनाफा दर्ज किया है। लेकिन, इस प्रॉफिट के पीछे एक बड़ा 'एक्सेप्शनल गेन' (Exceptional Gain) है, जबकि कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) बुरी तरह गिरा है।
National Oxygen का बदला फाइनेंशियल पिक्चर
National Oxygen Ltd ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने पिछले साल के ₹7.00 करोड़ के घाटे को पीछे छोड़ते हुए इस बार ₹1.84 करोड़ का नेट प्रॉफिट (Net Profit) कमाया है। वहीं, प्रति शेयर आय (EPS) भी ₹3.64 तक पहुंच गई है, जो पिछले साल -₹13.89 थी।
मुनाफे की असली वजह?
हालांकि, यह मुनाफा पूरी तरह से कंपनी के अपने बिजनेस से नहीं आया है। दरअसल, इस बार कंपनी को ₹8.12 करोड़ का एक बड़ा 'एक्सेप्शनल गेन' हुआ है, जिसके कारण मुनाफे में उछाल दिख रहा है। दूसरी ओर, कंपनी का मेन बिजनेस यानी रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस (Revenue from Operations) बुरी तरह पिटा है। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹40.58 करोड़ से 43.4% घटकर सिर्फ ₹22.96 करोड़ रह गया है।
कंपनी के सामने क्या है बड़ी चुनौती?
एक तरफ जहां प्रॉफिट की खबर अच्छी है, वहीं रेवेन्यू में भारी गिरावट और नॉन-ऑपरेशनल गेन पर निर्भरता कंपनी के लिए बड़ी चुनौती है। गंभीर प्रतिस्पर्धा (Competition) और बिजली की बढ़ी दरों (Power Tariff Hikes) के कारण कंपनी मार्जिन पर लगातार दबाव झेल रही है।
आगे क्या होगा?
इन चुनौतियों से निपटने के लिए कंपनी स्ट्रक्चरल बदलाव कर रही है और अपनी एसेट्स को मोनेटाइज (Monetize) करने की योजना बना रही है। कंपनी ने अपने पेरुनदुराई यूनिट (Perundurai Unit) में प्रोडक्शन 12 मई, 2025 से और पोंडिचेरी यूनिट (Pondicherry Unit) में लिक्विड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का प्रोडक्शन 7 अप्रैल, 2026 से बंद कर दिया है। इन यूनिट्स से मिले पैसे का इस्तेमाल कंपनी अपना कर्ज चुकाने और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने में करेगी।
वो प्लान जो वापस ले लिया गया
पहले Saraf Housing Development Private Limited को इक्विटी शेयर इश्यू करने का एक प्लान अप्रूव हुआ था, लेकिन शेयर की कीमतों में आई गिरावट के चलते अब उसे वापस ले लिया गया है।
किन बातों का रखना होगा ध्यान?
बाजार की निगाहें अब कंपनी की एसेट मोनेटाइजेशन प्लान पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि कंपनी कितनी जल्दी कर्ज कम कर पाती है। साथ ही, रेवेन्यू के ट्रेंड्स और कंपटीशन का मार्जिन पर असर पर भी नजर रखनी होगी।
