NRB Bearings लिमिटेड के प्रमोटर हर्षबीना साहनी ज़वेरी ने **1.96 करोड़** शेयर गिरवी से छुड़ाए हैं। यह कदम **₹65 करोड़** के पर्सनल लोन को चुकाने के बाद उठाया गया है। इस डी-प्लीजिंग से प्रमोटर की होल्डिंग मजबूत हुई है और मार्केट के जोखिम कम हुए हैं।
प्रमोटर ने छुड़ाए 1.96 करोड़ शेयर
NRB Bearings के प्रमोटर हर्षबीना साहनी ज़वेरी ने कंपनी के 1.96 करोड़ शेयर गिरवी से छुड़ा लिए हैं। यह 1.96 करोड़ शेयर, यानी कुल प्रमोटर होल्डिंग का 20.22%, ₹65 करोड़ के पर्सनल लोन को चुकाने के बाद मुक्त हुए हैं। यह डी-प्लीजिंग 11 और 12 जून, 2026 को दो दिनों में पूरी हुई।
11 जून 2026 को टाटा कैपिटल लिमिटेड से 69 लाख शेयर छुड़ाए गए। वहीं, 12 जून 2026 को आदित्य बिड़ला कैपिटल लिमिटेड से 1.27 करोड़ शेयर छुड़ाए गए।
क्यों है यह बड़ी खबर?
इस कदम से प्रमोटर की गिरवी रखी गई कुल शेयर्स की संख्या 3.06 करोड़ से घटकर 1.10 करोड़ रह गई है। प्रमोटर द्वारा गिरवी रखे गए शेयर्स में इतनी बड़ी कमी आना एक सकारात्मक संकेत है। इससे मार्जिन कॉल के कारण होने वाली संभावित जबरन बिक्री का जोखिम कम होता है, जिससे प्रमोटर की हिस्सेदारी को स्थिरता मिलती है। यह ध्यान देने योग्य है कि यह प्रमोटर के पर्सनल लोन से जुड़ा मामला है, इसलिए इसका कंपनी की बैलेंस शीट पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।
क्या था बैकग्राउंड?
इस बड़े ट्रांजेक्शन से पहले, प्रमोटर के 3,06,68,681 शेयर गिरवी रखे हुए थे। इस हालिया एक्शन ने इस संख्या को काफी कम कर दिया है, जो प्रमोटर के पर्सनल लोन देनदारियों को प्रबंधित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अब क्या बदलेगा?
इन शेयर्स के मुक्त होने के बाद, प्रमोटर की सीधी हिस्सेदारी अब बाजार की अस्थिरता के प्रति कम संवेदनशील होगी। बाकी बचे गिरवी शेयर्स एक मजबूत कोलैटरल (सुरक्षा) बफर द्वारा समर्थित हैं। वर्तमान में, इनके लिए 7.35:1 का एसेट कवर रेशियो है, जो यह दर्शाता है कि इनके बदले रखी गई संपत्ति का मूल्य कर्ज से 7.35 गुना ज्यादा है।
निवेशको के लिए क्या है जोखिम?
हालांकि यह एक सकारात्मक विकास है, निवेशकों को अभी भी बचे हुए गिरवी शेयर्स और प्रमोटर की समग्र वित्तीय स्थिति पर नज़र रखनी चाहिए। बाकी बचे कर्ज़ के लिए कोलैटरल कवर मजबूत है, जिससे इस विशेष सुरक्षा से तत्काल जोखिम कम होने की संभावना है।
आगे क्या देखना है?
निवेशकों को प्रमोटर की शेयरधारिता (shareholding) से संबंधित किसी भी आगे की घोषणाओं और भविष्य में डी-प्लीजिंग (गिरवी से छुड़ाने) के प्रयासों पर नज़र रखनी चाहिए। कंपनी के समग्र वित्तीय प्रदर्शन और ऋण स्तरों की निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी।
