NMDC ने शानदार प्रदर्शन करते हुए **53.16 मिलियन टन** आयरन ओर के रिकॉर्ड प्रोडक्शन के साथ अपना फाइनेंशियल ईयर पूरा किया है। कंपनी का रेवेन्यू **33%** बढ़कर **₹31,554 करोड़** और नेट प्रॉफिट **₹7,421 करोड़** पर पहुंच गया है। हालांकि, कानूनी विवादों और गवर्नेंस के मुद्दों ने निवेशकों के लिए जोखिम भी बढ़ा दिया है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और डिविडेंड
कंपनी ने इस साल बेहतरीन आंकड़े पेश किए हैं। ऑपरेशंस से रेवेन्यू में 33.31% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस दमदार परफॉर्मेंस का फायदा शेयरधारकों को भी मिलेगा, क्योंकि कंपनी ने ₹1.00 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है। इससे पहले ₹2.50 का इंटरिम डिविडेंड पहले ही दिया जा चुका है।
विजन 2030 और भविष्य की रणनीति
NMDC अब सिर्फ आयरन ओर तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी 'विजन 2030' के तहत 100 MTPA प्रोडक्शन क्षमता का लक्ष्य लेकर चल रही है। साथ ही, टोकीसुद नॉर्थ ब्लॉक के जरिए कमर्शियल कोल माइनिंग में एंट्री कर कंपनी मल्टी-मिनरल प्लेयर बनने की राह पर है। लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने के लिए किरंदुल-जगदलपुर रेल लाइन और स्लरी पाइपलाइन का काम भी तेजी से पूरा किया जा रहा है। कंपनी ने ग्लोबल मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए दुबई और सिडनी में भी ऑफिस खोले हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम के संकेत
शानदार नतीजों के बीच कुछ चुनौतियां भी हैं जिन पर नजर रखना जरूरी है:
- गवर्नेंस इश्यूज: कंपनी ने SEBI LODR नियमों के तहत बोर्ड कंपोजिशन, जिसमें इंडिपेंडेंट और महिला डायरेक्टर्स की संख्या अनिवार्य है, उसमें नॉन-कंप्लायंस रिपोर्ट किया है।
- कानूनी पेच: कंपनी पर भारी-भरकम कानूनी और टैक्स लायबिलिटी का दबाव है। कर्नाटक में मिनरल राइट्स के लिए ₹15,481.72 करोड़ और छत्तीसगढ़ में प्रोडक्शन से जुड़े मामले में ₹1,623.44 करोड़ की पेनल्टी की मांग लंबित है।
वित्तीय वर्ष के अंत में कंपनी की नेट वर्थ ₹33,836 करोड़ रही, जबकि कंपनी ने अपने सालाना CAPEX खर्च को 8.91% घटाकर ₹3,384 करोड़ कर दिया है।
