NIS Management Ltd ने FY26 के लिए **₹1.85 करोड़** का कंसोलिडेटेड घाटा दर्ज किया है, जिसका मुख्य कारण नए लेबर कोड्स के लिए किया गया **₹27.82 करोड़** का प्रोविजन है। हालांकि, कंपनी का कोर EBITDA **12.19%** बढ़कर **₹33.53 करोड़** हो गया है।
अकाउंटिंग प्रोविजन का असर
NIS Management Ltd की ओर से जारी 20वीं एनुअल रिपोर्ट के मुताबिक, यह लिस्टिंग के बाद कंपनी का पहला पूरा फाइनेंशियल ईयर था। जहां कंपनी ने ₹1.85 करोड़ का नेट लॉस रिपोर्ट किया है, वहीं पिछले साल कंपनी ने ₹18.67 करोड़ का मुनाफा कमाया था। निवेशकों को समझना होगा कि यह घाटा ऑपरेशंस की विफलता नहीं, बल्कि नवंबर 2025 में आए नए सरकारी लेबर कोड्स के कारण ₹27.82 करोड़ का वन-टाइम प्रोविजन करने से हुआ है। अगर इस प्रोविजन को हटा दिया जाए, तो कंपनी का मुनाफा ₹19.12 करोड़ रहता।
मजबूत ऑपरेशनल परफॉर्मेंस
ऑपरेशंस के मामले में कंपनी का प्रदर्शन काफी सुधरा है। कंसोलिडेटेड EBITDA 12.19% बढ़कर ₹33.53 करोड़ पर पहुंच गया है, जो कंपनी के हाई-मार्जिन फैसिलिटी मैनेजमेंट और इलेक्ट्रॉनिक सिक्योरिटी सेगमेंट पर बढ़ते फोकस को दर्शाता है।
FY27 का आउटलुक
मैनेजमेंट ने FY27 के लिए 12-15% ग्रोथ और ₹500 करोड़ रेवेन्यू का टारगेट रखा है। Q1 FY27 की शुरुआत बेहद मजबूत रही है, जिसमें टोटल इनकम 15.68% बढ़कर ₹115.44 करोड़ रही, जबकि प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 35% की बढ़त के साथ ₹6.40 करोड़ रहा।
रिस्क और चुनौतियां
निवेशकों को दो मुख्य बातों पर नजर रखनी चाहिए:
- ** receivables:** कंपनी के पास करीब ₹145 करोड़ के बकाया भुगतान (receivables) फंसे हैं, जिन्हें वसूलना कंपनी की प्राथमिकता है।
- Compliance: सेक्रेटेरियल ऑडिट में फाइलिंग से जुड़ी कुछ खामियां सामने आई हैं, जिसके लिए कंपनी ने सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
